लाखों खर्च के बावजूद भागलपुर में डॉग स्क्वाॅयड की टीम बेकाम हो गई है। जब भी तहकीकात में इसका उपयोग किया जाता है, तब हमेशा नाकामी ही हाथ लगती है। पिछले सप्ताह दो हाई प्रोफाइल मामले में डॉग स्क्वाॅयड की मदद ली गई। लेकिन ट्रैकर ने पुलिस को कोई सुराग नहीं दिया। ऐसे में सवाल उठता है कि डॉग स्क्वायड टीम पर हर साल सरकार लाखों रुपए खर्च करती हैं, फिर इसकी रिपोर्ट जीरो अाने पर टीम का भागलपुर में होना, न होना क्या मुख्यालय की नजर में कोई मायने रखता है या नहीं?…।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इन केसों में तहकीकात के बावजूद डॉग स्क्वाॅयड पुलिस को नहीं दे पाया कोई सुराग
केस- 1 : 16 अक्टूबर को बरारी थाने के हाउसिंग कॉलोनी में विदेश विभाग के प्रवक्ता रविश कुमार व लेफ्टिनेंट कर्नल आशीष आनंद के घर चोरों ने लाखों के जेवरात, कैश, टीवी आदि चुरा लिए। अगले दिन पुलिस ने डॉग स्क्वाॅयड की मदद ली। लेकिन निराशा ही हाथ लगी।
केस- 2 : 19 अक्टूबर को जीरोमाइल थाना क्षेत्र के गोपालपुर में रिटायर्ड एक्साइज दारोगा प्रमोद सिंह के घर दिनदहाड़े ताला तोड़कर चोरों ने लाखों के जेवर व नकदी चुरा लिया। इसमें भी पुलिस ने डॉग स्क्वाॅयड की मदद ली। लेकिन पुलिस के हाथ कोई सुराग नहीं लगा।

सवाल…क्या जीरो रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय की नजर में नहीं है
जानें डॉग स्क्वाॅयड में कितने श्वान हैं
धीमा एक्सप्लोसिव एक्सपर्ट
मानक ट्रैकर डॉग
गंगा स्निफर डॉग
चेतन ट्रैकर डॉग
डीमा एक्सप्लोसिव डॉग
गिड्डी एक्सप्लोसिव डॉग
होम ट्रैकर डॉग
समस्या दूर करने के प्रयास किए जा रहे है
डॉग स्क्वाॅयड की विफलता की यह है वजह
22 अप्रैल को एडीजी ने श्वानों के रखरखाव पर उठाया था सवाल
सूत्र बताते हैं कि डॉग स्क्वाॅयड की भूमिका बड़े मामले में महज आई वॉश करने के लिए किया जाता है। 22 अप्रैल 2018 को जब सीआईडी के एडीजी विनय कुमार भागलपुर स्थित श्वान दस्ता का निरीक्षण किया था, तब उन्होंने दस्ते में शामिल कुत्तों का वजन बढ़ने पर सवाल उठाया था। उन्होंने चोरी, गृहभेदन और हत्या जैसी घटनाओं में श्वान दस्ता के कुत्तों को घटनास्थल पर नहीं ले जाने पर भी सवाल उठाया था। एडीजी ने स्पष्ट कहा था कि डॉग स्क्वाॅयड का उपयोग नहीं किए जाने से ही वह स्थूल होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि कुत्तों को रोजाना एक्सरसाइज कराना और दौड़ाना जरूरी है।
