भागलपुर : दो दुकानों से लाखों रुपये के डुप्लीकेट किताब बरामद, फर्जीवाड़ा का पर्दाफाश

भागलपुर / पटना

भागलपुर : देश भर में डुप्लीकेट किताबों के विरुद्ध चल रही जांच भागलपुर पहुंची. एसएसपी के निर्देश पर डीएसपी मुख्यालय के नेतृत्व में गठित टीम ने शहर की एक दर्जन से अधिक किताब दुकानों और उनके गोदामों में छापेमारी की.

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इस दौरान दो किताब दुकान संजय बुक स्टोर और कृष्णा बुक डिपो से लाखों रुपये की डुप्लीकेट किताबें बरामद हुई हैं. पुलिस ने डुप्लीकेट किताबों को जब्त कर संजय बुक स्टोर के मालिक संजय कुमार अग्रवाल और कृष्णा बुक डिपो के मालिक कृष्णा गुप्ता के रिश्तेदार दिवेश कुमार को गिरफ्तार किया है.

रविवार को गिरफ्तार किये गये दोनों लोगों को थाने से ही बेल दे दी गयी. छापेमारी के दौरान नयी दिल्ली स्थित किताब प्रकाशक ‘भारती भवन’ के एंटी पाइरेसी सेल के अधिवक्ता संजीव कुमार राघव भी मौके पर मौजूद थे. उन्होंने ऑरिजनल और डुप्लीकेट किताबों को चिह्नित किया.

भागलपुर के एक छात्र ने फोन कर दी थी डुप्लीकेसी की सूचना

प्रकाशक का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता संजीव राघव ने बताया कि करीब एक माह पूर्व भागलपुर से किसी छात्र ने प्रकाशक को फोन कर दुकानदार द्वारा उसे डुप्लीकेट किताब दिये जाने की शिकायत की थी.

इसके बाद प्रकाशक ने कुछ छात्रों और लोगों की टीम बना कर डुप्लीकेट किताबों की जांच करने के लिए भागलपुर भेजा. जहां शहर के कुछ दुकानों में भारती भवन कंपनी के डुप्लीकेट किताबों की बिक्री होने की पुष्टि हुई. इसके बाद प्रकाशक ने भागलपुर एसएसपी को शहर में चल रहे किताबों के गोरखधंधे के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की. शनिवार शाम दिल्ली से भागलपुर पहुंचे प्रकाशक के अधिवक्ता ने एसएसपी से मिल कर छापेमारी करने की बात कही. इस पर एसएसपी ने डीएसपी मुख्यालय रमेश कुमार के नेतृत्व में कोतवाली थाना पुलिस की टीम का गठन कर छापेमारी के निर्देश दिये. इसके बाद पुलिस ने एक साथ शहर के एक दर्जन से भी अधिक दुकानों और उनके गोदाम में धावा बोला. इसमें दो दुकानों से लाखों रुपये के डुप्लीकेट किताब बरामद हुए.

बरामद डुप्लीकेट किताबों में भारती भवन प्रकाशक के कक्षा एक से दसवीं तक के सैकड़ों किताब मौजूद थे. बताया कि जा रहा है कि यह केवल एक प्रकाशक की ओर से करायी गयी छापेमारी के बाद इतने किताब बरामद किये गये हैं. अन्य प्रकाशक भी अगर शहर की दुकानों में सर्वे कराएंगे, तो करोड़ों की डुप्लीकेट किताबों के फर्जीवाड़ा का पर्दाफाश हो सकता है.