भागलपुर और नवगछिया के बीच जनजीवन मानो दो दशक पीछे लौट गया
विक्रमशिला सेतु का एक स्लैब गंगा में समाने के बाद भागलपुर और नवगछिया के बीच जनजीवन मानो दो दशक पीछे लौट गया है। सड़क संपर्क पूरी तरह बाधित होने से अब लोगों को नाव के सहारे गंगा पार करनी पड़ रही है।
जिला प्रशासन ने हालात संभालने के लिए गंगा जलमार्ग को वैकल्पिक साधन के रूप में शुरू किया है। सबौर के बाबूपुर गंगा घाट से महादेवपुर (नवगछिया) तक अस्थायी नाव सेवा चालू की गई है।
घाटों पर भीड़ और अफरा-तफरी
मंगलवार सुबह से ही बाबूपुर घाट और आसपास भारी भीड़ देखने को मिली। लोग लंबी कतारों में खड़े नजर आए। प्रशासन खुद व्यवस्था संभालते हुए लोगों को नावों से पार उतार रहा है। यहां दो सरकारी नि:शुल्क नावों के साथ तीन निजी नावें भी चलाई जा रही हैं, जो निर्धारित शुल्क ले रही हैं।

सीमित समय, बढ़ती परेशानी
नाव सेवा सुबह 5 बजे से शाम 5 बजे तक ही चल रही है। यात्रियों की संख्या के मुकाबले यह व्यवस्था कम पड़ रही है। नावों की धीमी गति के कारण एक बार पार करने में ज्यादा समय लग रहा है, जिससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
घाट तक पहुंचना भी मुश्किल
यात्रियों के लिए घाट तक पहुंचना भी चुनौती बना हुआ है। कच्चे और फिसलन भरे रास्ते, धूल और गड्ढों से भरे मार्ग लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। तेज गर्मी में खासकर महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे ज्यादा परेशान हो रहे हैं।
खर्च और सुविधाओं का अभाव
घाट तक पहुंचने के लिए टोटो और ऑटो का अतिरिक्त किराया देना पड़ रहा है। शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी भी दिख रही है। कुछ यात्रियों ने किराए में मनमानी की शिकायत की—एक तरफ 30 रुपये और वापसी में 100 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
यात्रियों की जुबानी
- छात्राएं पूजा कुमारी और प्रतिमा कुमारी: परीक्षा रद्द, अब घर लौटने में दिक्कत
- सुनीता देवी: गर्मी और भीड़ से हालात कठिन
- सुरेश मंडल: मवेशी के दाने के लिए जाना है, लेकिन नाव का इंतजार सबसे बड़ी समस्या
रात में ठहरने की मजबूरी
शाम के बाद नाव सेवा बंद होने से कई लोग फंस जा रहे हैं। शादी या इलाज के लिए आए लोगों को रात में रुकना पड़ रहा है।
ग्रामीण और किसान सबसे ज्यादा प्रभावित
रोजमर्रा के काम के लिए गंगा पार करने वाले ग्रामीणों और किसानों की परेशानी सबसे ज्यादा बढ़ गई है। नाव सेवा अस्थायी राहत जरूर दे रही है, लेकिन मौजूदा जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त नहीं है।
