मायागंज मोहल्ले के नूरपुर कोयरी टोला में रिटायर स्वास्थ्यकर्मी जनार्दन प्रसाद यादव के पुत्र संदीप कुमार यादव (32) ने फांसी लगा कर जान देदी। घटना गुरुवार आधी रात की है। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक भगत से संदीप का इलाज चल रहा था। पिता के मुताबिक, वह डिप्रेशन में था। संदीप ने अपने कमरे में बांस के सहारे गमछा का फंदा बना कर फांसी लगाई। सुबह में परिजनों को घटना की जानकारी हुई। इसके बाद बरारी पुलिस को सूचना दी गई। थाने के एसआई अजय शर्मा मौके पर पहुंच मामले की जांच की और लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। दो भाइयों में संदीप छोटा था।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!उसका बड़ा भाई संजीव सीमा सुरक्षा बल में गुजरात में तैनात है। घटना की जानकारी पाकर वह भी भागलपुर रवाना हो गया। पिता नेबताया कि संदीप की शादी नहीं हुई थी। वह बेरोजगार भी था। मानसिक रोग विशेषज्ञ से चल रहा था इलाज पाइप हो गया टेढ़ा तो बांस में लगाई फांसी संदीप ने कमरे में लोहे की पाइप से फंदा बांध कर फांसी लगाने की कोशिश की। लेकिन पाइप संदीप का वजन सह नहीं पाया और टेढ़ा हो गया।

तब उसने बरामदे से बांस लाकर कमरे में दीवार में उसे लगाया और उससे फंदा बांध कर झूल गया। पुलिस पहुंची तो फंदा काट कर लाश को नीचे उतारा गया। संदीप ने आइएससी तक की पढ़ाई की थी। पिता ने उसे दो बार मायागंज अस्पताल में कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी लगवाने का प्रयास किया, लेकिन वह काम करने को तैयार नहीं हुआ। डिप्रेशन को कम करने के लिए परिजनों ने संदीप की शादी के लिए लड़की भी देखना शुरू कर दिया था। 2010 में एक्सीडेंट के बाद ब्रेन में आई थी चोट, तब से डिप्रेशन में था संदीप 2010 में संदीप का उसका एक्सीडेंट हो गया था, जिसमें उसके सिर में गंभीर चोट आई थी।

सात लाख रुपए खर्च करके उसके ब्रेन का ऑपरेशन कराया था। डॉक्टरों ने कहा था कि इसे जरा भी तनाव होगा तो यह कोई भी कदम उठा सकता है। ऑपरेशन के बाद लगातार संदीप मानसिक रूप बीमार रहने लगा। तब डॉ. अशोक भगत के यहां से उसका इलाज शुरू करवाया गया। गुरुवार की सुबह में संदीप अपनी मां का पैर पकड़ कर रोने लगा। कहने लगा मुझे जहर लाकर दो, मैं जीना नहीं चाहता हूं। मुझे मुक्ति चाहिए। मां ने काफी समझा तो संदीप शांत हुआ। रात में करीब दस बजे संदीप ने खाना खाया और अपने कमरे में सोने चला गया। इसके बाद उसने फांसी लगा कर जान दे दी
