पटना : राज्य में नियोजित शिक्षकों के गायब रिकार्ड (नियोजन फोल्डर) के मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने की तैयारी हो रही है। पटना उच्च न्यायालय के आदेश पर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में अब तक 71 हजार नियोजित शिक्षकों के रिकार्ड नहीं मिले हैं। शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के रिकार्ड मुहैया नहीं कराने वाली नियोजन इकाईयों पर फौरी कार्रवाई करने की छूट विजिलेंस विभाग को दी है। 21 जनवरी को शिक्षा विभाग के अफसरों के साथ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच टीम की बैठक होने वाली है। इस बैठक में संबंधित नियोजन इकाईयों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!गत नवंबर में शिक्षा विभाग ने जांच टीम को नियोजित शिक्षकों के सभी रिकार्ड मुहैया कराने का आदेश जिला शिक्षा पदाधिकारियों को दिया था, लेकिन नियोजित शिक्षकों के रिकार्ड नियोजन इकाईयों से गायब पाए गए। निगरानी की टीम 3.22 लाख नियोजित शिक्षकों के मामले की जांच कर रही है। अबतक 2.51 लाख शिक्षकों के रिकार्ड ही नियोजन इकाईयों से मिले हैं। शिक्षा विभाग के मुताबिक निगरानी की टीम सभी जिलों में नियोजित शिक्षकों की जांच कर रही है, लेकिन जिन शिक्षकों के रिकार्ड नहीं मिले हैं, उन्हें चिन्हित किया जा रहा है। जांच में फर्जी डिग्री पर नियुक्त और एक ही डिग्री पर दो-दो जगह नौकरी कर रहे शिक्षकों का मामला भी सामने आ चुका है।

535 फर्जी शिक्षकों पर प्राथमिकी दर्ज
शिक्षा विभाग के मुताबिक निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने जांच प्रक्रिया में 535 फर्जी नियोजित शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। इनमें जहानाबाद में 42, बक्सर में 43, रोहतास में 29, भोजपुर में 46, मधुबनी में 33, पश्चिम चंपारण एवं पूर्वी चंपारण में 23, दरभंगा में 31, नवादा में 45, पटना में 5, पूर्णिया में 5, अररिया में 4, मुजफ्फरपुर में 14 और मुंगेर में 3 शिक्षक शामिल हैं। इसके अलावा मुजफ्फरपुर में दो और भोजपुर की नियोजन इकाई के तीन पदाधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है।
