पटना : स्वस्थ युवक को एड्स पीड़ित बता किया इलाज, पांच लाख का जुर्माना

राष्टीय / अंतरराष्टीय

पटना : स्वस्थ आदमी को एचआइवी (एड्स) पीड़ित बता कर इलाज करने वाले शहर के एक निजी अस्पताल और उससे जुड़े चिकित्सक पर जिला उपभोक्ता फोरम ने पांच लाख रुपये का अर्थ दंड लगाया है.

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इसके अलावा दोषी पक्ष से कहा है कि वह मुकदमे पर खर्च हुए दस हजार रुपये का भुगतान फरियादी को दें. पटना जिला उपभोक्ता फोरम के आदेश का पालन चार महीने बाद भी नहीं किया गया है. पीड़ित पक्ष या फरियादी आदेश के पालन के लिए एक बार फिर उपभोक्ता फोरम की शरण में है.

जानकारी के मुताबिक यह फैसला मालीटोला शेखपुरा निवासी लाल बाबू भगत विरुद्ध डॉ बिमल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर प्राइवेट लिमिटेड इत्यादि केस की सुनवाई करते मार्च

2018 को जिला उपभोक्ता फोरम के डिस्ट्रिक्ट सेशन जज (रिटायर्ड ) निशा नाथ ओझा एवं फोरम की सदस्य करिश्मा मंडल की संयुक्त पीठ ने दिया है. हालांकि निर्णय की औपचारिक कॉपी अगस्त 2018 तक संबंधित पक्ष को जारी की जा सकी. फोरम ने अपने फैसले में इस मामले को शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़ना से जुड़ा माना है.

उपभोक्ता फोरम ने लगाया अर्थ दंड, आदेश का पालन करने में आनाकानी करने पर फिर पिटीशन दाखिल
पीएमसीएच की जांच में स्वस्थ निकला

जानकारी के मुताबिक चूंकि एड्स का इलाज महंगा था, इसलिए लाल बाबू जांच कराने 9 अप्रैल, 2012 को ही पीएमसीएच पहुंचे. पीएमसीएच की जांच में लाल बाबू को एकदम स्वस्थ बताया. यहां की जांच रिपोर्ट एचआइवी निगेटिव निकली.

इस जांच रिपोर्ट के आधार पर पीड़ित लाल बाबू की तरफ से उपभोक्ता फोरम में केस संख्या 162/12 दर्ज करायी. चिकित्सक और उसके संस्थान को कई बार नोटिस भेजे गये. हालांकि आरोपित पक्ष ने इसके जवाब नहीं दिये. अंत में लंबी सुनवाई के बाद उपभोक्ता फोरम की बैंच ने डॉ बिमल कुमार हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के खिलाफ फैसला सुनाया.

जांच रिपोर्ट में एचआइवी पॉजीटिव बताया गया

जानकारी के मुताबिक सात मार्च, 2012 को लाल बाबू भगत अपनी तकलीफ लेकर शेखपुरा राजाबाजार स्थित बिमल हॉस्पीटल एंड रिसर्च सेंटर पहुंचे. यहां लाल बाबू को एचआइवी टेस्ट के लिए एसके लैब, पटना भेजा गया. भगत को जांच रिपोर्ट में एचआइवी पॉजीटिव बताया गया. इस रिपोर्ट के आधार पर डॉ बिमल ने खुद भी जांच की. इसके बाद डॉ बिमल ने जांच रिपोर्ट के आधार पर उसका एड्स का इलाज भी शुरू कर दिया.

जिला उपभोक्ता फोरम का यह फैसला मील का पत्थर साबित होगा. मरीजों और आम आदमी के हक में यह फैसला है. पीड़ित पक्ष को अभी तक पांच लाख रुपये का जुर्माना नहीं मिला है. इसके लिए आदेश के पालन कराने के लिए अर्जी लगायी गयी है. इस आदेश के बाद तमाम लोगों को न्याय पाने का रास्ता खुलेगा जो अस्पतालों में तमाम तरीकों से धोखाधड़ी के शिकार होते हैं.
अमित, वरिष्ठ अधिवक्ता, वादी पक्ष के पैरवीकर्ता