नवगछिया : 4 साल के बेटे ने शहीद पिता को दी मुखाग्नि.. अंतिम संस्कार में पूरा गांव

NEWS

नवगछिया : जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में शहीद हुए संतोष यादव गुरुवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। 4 साल के बेटे लक्ष्य ने उन्हें मुखाग्नि दी।

Whatsapp group Join

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

इससे पहले तीनों बेटियों ने पिता को सेल्यूट किया। सेना के अधिकारियों ने तिरंगे में लिपटी जवान की वर्दी बड़ी बेटी दीक्षा को दी। वो वर्दी से लिपटकर रोने लगी।

भागपुर के इस्माइलपुर गांव से 1 किलोमीटर दूर संतोष यादव का अंतिम संस्कार हुआ। शहीद के अंतिम संस्कार में पूरा गांव उमड़ पड़ा।

साथी जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। प्रशासन के साथ सेना का अधिकारियों ने शहीद को श्रद्धांजलि दी। पार्थिव शरीर के घर पहुंचने से पहले ही लोगों की भीड़ सेना की गाड़ी के साथ-साथ दिखाई दी। भारत माता के नारे लगे। लोगों ने घरों की छतों से फूल बरसाए।

शहीद पिता के पार्थिव शरीर से लिपटकर रोता बेटा।
शहीद पिता के पार्थिव शरीर से लिपटकर रोता बेटा।

पिता से बात करने की जिद करता रहा बेटा

पार्थिव देह के घर पहुंचते ही 4 साल का बेटा पिता से लिपटकर रोने लगा। वो बार-बार लोगों से ये कह रहा था- ‘पापा से बात करवाओ, वो उठ क्यों नहीं रहे हैं।’ शहीद की पत्नी भी पार्थिव शरीर के पहुंचते ही फूट-फूटकर रो पड़ी।

रोते-रोते कह रही थी, ‘एक अक्टूबर को मेरे पति की वर्दी पर स्टार लगता। उनका प्रमोशन होने वाला था। वो JCO बनते।’ शहीद की पत्नी ने हाथ जोड़कर पार्थिव शरीर की परिक्रमा भी की। भागलपुर से नवगछिया तक भारत माता के नारे लगे

हाथ जोड़कर शहीद पति के पार्थिव शरीर की परिक्रमा करती पत्नी।
हाथ जोड़कर शहीद पति के पार्थिव शरीर की परिक्रमा करती पत्नी।

सड़कों पर तिरंगा लिए खड़े रहे लोग

जवान की पार्थिव देह को फूलों से सजी सेना की गाड़ी में सुबह 8 बजे के करीब गांव लाया गया। रास्ते में भागलपुर से नवगछिया तक भारत माता के नारे लगते रहे।

जिन रास्तों से जवान को लाया गया लोग सड़कों पर तिरंगा लिए दिखाई दिए। सेना की गाड़ी के साथ देश भक्ति गीत बजते रहे।

शहीद संतोष यादव के भाई अभिनव कुमार ने बताया- ‘भाई की मौत आतंकियों के साथ मुठभेड़ में हुई है। वो 4 साल में रिटायर्ड होने वाले थे। अपने बड़े बेटे को भी सेना में भेजना चाहते थे।’

शहीद के गांव की तस्वीरें देखिए…

शहीद की अंतिम यात्रा में लोगों की भीड़।
शहीद की अंतिम यात्रा में लोगों की भीड़।