नवगछिया : 28 को नहाय खाय के साथ लोक आस्था का महापर्व छठ होगा शुरू

धर्म

नवगछिया : लोक आस्था का महापर्व छठ का चार दिवसीय महाअनुष्ठान 28 अक्टूबर शुक्रवार को नहाय खाय के साथ शुरू हो जाएगा। पहले दिन छठव्रती सुबह में उठकर इंटा के चुल्हे पर आम की लकड़ी से अरवा चावल का भात व कददु् की सब्जी व चना दाल पकाएंगे। फिर भगवान सूर्य को भेाग लगाकर परिवार समेत इस्ट मित्र लोग भी इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करेंगे। दूसरे दिन 29 अक्टूबर शनिवार को संध्या समय खरना होगा।

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जिसमें छठव्रती दिन भर निर्जला उपवास रहकर सूर्यास्त के बाद शुद्ध दुध से खीर बनाकर व पूजन कर भगवान सूर्य को भेाग लगाएंगे। इसके पश्चात प्रसाद के रूप में स्वयं ग्रहण कर अन्य भक्तश्रद्धालुओं के बीच इसे महाप्रसाद के रूप वितरीत किया जाएगा।

छठव्रत अनुष्ठान के तीसरे दिन 30 अक्टूबर रविवार को छठव्रती निर्जला व्रत रखकर संध्या काल में अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को पहला अर्घ्य प्रदान किया जाएगा। अनुष्ठान के चौथे दिन 31 अक्टूबर सोमवार की सुबह में उगते हुए भगवान सूर्य को छठव्रती सूर्य सरोवर में खड़ा होकर श्रद्धा व भक्ति के साथ दूसरा अर्घ्य प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही चार दिनों का सूर्योपासना का महापर्व छठ सम्पन्न हो जाएगा।

छठ व्रत में दान का विशेष महत्व

छठ व्रत के बारे में सूर्य मंदिर के पुजारी पंडित रामरूप मिश्र ने बताया कि उदीयमान भगवान सूर्य को दूसरा अर्घ्य अर्पित करने के बाद भगवान सूर्य की पूजा का विधान है। छठव्रतियों को पूर्णाहुति पर ब्राहमण भोजन, अन्न, फल दानकर व्रत का पारण करना चाहिए। इससे छठव्रतियों को विशेष फल मिलता है।

चतुर्थी (नहाय-खाय) : इस दिन छठव्रती पवित्र जल से स्नान कर अपने घर प्रसाद तैयार करते हैं। वे एक वक्त का खाना कद्दू-भात के रूप में ग्रहण करते हैं।

29 अक्टूबर को खरना के साथ 36 घंटे का निर्जला व्रत

पंचमी (खरना) :पूरे दिन उपवास के बाद शाम में धरती की पूजा के बाद खीर, पूरी और फल अर्पित करते हैं। इसके बाद 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू करते हैं।

षष्ठी (सांध्यकालीन अर्घ्य) : इसदिन व्रती जलाशयों के किनारे डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। रात में पांच गन्ने से कवर कोसी सजाकर गीत-संगीत गाया जाता है।

सप्तमी (पारन) : छठव्रती उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। दूध अर्पण किया जाता है, परिवार के लोग हिस्सा लेते हैं। तब व्रती छठ प्रसाद खाकर व्रत खोलते हैं।