नारायणपुर (नवगछिया): नारायणपुर प्रखंड के बैकठपुर दुधैला पंचायत स्थित कसमाबाद गांव में गंगा नदी का कटाव भयावह रूप ले चुका है। पिछले पंद्रह दिनों से जारी इस कटाव में अब तक 50 से अधिक घर नदी में समा गए हैं। इनमें इंदिरा आवास योजना के तहत बने 20 पक्के मकान और 30 से अधिक कच्चे घर शामिल हैं। कई अन्य घरों पर भी गंगा का खतरा मंडरा रहा है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सड़क, बिजली और खेती सब गंगा में समाए
कटाव के कारण ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी अस्त-व्यस्त हो गई है।
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनी मिर्जापुर-कसमाबाद मुख्य सड़क करीब दो किलोमीटर तक नदी में समा चुकी है।
इसके अलावा तीन अन्य ग्रामीण सड़कों पर भी कटाव का खतरा मंडरा रहा है।
बिजली के खंभे, नल-जल पाइपलाइन, चापाकल, नाले और लगभग 50 बीघा उपजाऊ जमीन गंगा की लहरों में समा चुकी है।
कटाव के लिए अवैध खनन को बताया जिम्मेदार
ग्रामीणों — गीता देवी, चांदनी देवी, रंजीत मंडल, गुड्डू मंडल, चंद्र हास मंडल, सुको मंडल, अभय मंडल, मुकेश मंडल, वंदना कुमारी और गौतम कुमार ऋषि — का कहना है कि सुल्तानगंज क्षेत्र में गंगा नदी से हो रहे अवैध बालू खनन के कारण नदी की पुरानी धारा फिर से सक्रिय हो गई है।
अब यह धारा विकराल रूप लेकर लगातार कटाव कर रही है, जिससे लोग बेहद परेशान हैं।

बेघर हुए लोग कर रहे हैं गुजारा
घर बह जाने के बाद ग्रामीण अब दूसरों की जमीन पर प्लास्टिक टांगकर किसी तरह जीवन गुजार रहे हैं। कई जगहों पर जमींदार उनकी झोपड़ियों को भी हटाने की धमकी दे रहे हैं, जिससे पलायन की नौबत आ गई है। अब तक किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने गांव का दौरा नहीं किया है।
समाजसेवियों ने लगाई गुहार
समाजसेवी रंजीत कुमार मंडल ने बताया कि कटाव बहुत तेजी से बढ़ रहा है और तत्काल राहत कार्य जरूरी है।
उन्होंने प्रशासन से मेडिकल टीम भेजने और कटाव-रोधी कार्य शुरू करने की मांग की है।
ग्रामीणों ने भी जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि हालात बेकाबू होने से पहले गंगा कटाव पर नियंत्रण के ठोस कदम उठाए जाएं।
