नवगछिया । बीते दो दशक से वर्चव की लड़ाई में एक दर्जन से अधिक हत्याओं के बाद विधवाओं के गांव कहे जाने वाले भवानीपुर में फिर से खूनी संघर्ष के आसार दिखने लगे हैं। दो दशक तक गोलियों की तड़तड़ाहट और हत्याओं के दौर से दहशत में जी रहे भवानीपुर के लोगों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन अपराध का रास्ता छोड़कर सामाजिक जीवन जी रहे कुमोदी यादव के भाई की हत्या ने शांत पड़ी वर्चस्व की लड़ाई में चिंगारी का काम किया है, जिससे भवानीपुर एक बार फिर से अशांत हो सकता है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!वर्चस्व की लडाई का लंबा इतिहास रहा है भवानीपुर का
भवानीपुर में दो दशक तक वर्चस्व की लड़ाई में दो दर्जन से अधिक लोगों की जानें गयी हैं। वर्ष 1994 में पानी के विवाद में जनार्दन तूफान की हत्या कर दी गयी थी। उसके बाद 1996 में वर्चस्व की लड़ाई में मुनील यादव की हत्या हुई। भवानीपुर निवासी मुनील यादव और कुमोदी यादव के बीच वर्चस्व की लड़ाई में कई जानें गयीं। मुनील यादव के छोटे भाई टुनो यादव की खरीक में रंगदारी मांगने जाने के दौरान लोगों ने पीट पीट कर हत्या करदी थी।
वहीं वर्चस्व की लड़ाई में 2008 में घर पर खाना खा रहे नंदकिशोर यादव की गोली मारकर हत्या कर दी थी। 2009 में मुनील यादव के भाई लालो यादव की हत्या हुई जबकि 2010 में एक ही दिन मुनील यादव के दो भाई पवन यादव और रितेश यादव की ह्त्या कर दी गयी थी। पवन यादव का शव नगरह के स्टेट बोरिंग के पास मिला था जबकि दूसरे भाई रितेश का शव भवानीपुर में रेलवे पटरी के पास पड़ा हुआ था। 2012 में मुनील के भाई छबला यादव की हत्या कर दी गयी।

सबसे छोटा ब्रजेश यादव घटना के बाद से नवगछिया छोड़कर फरार हो गया था लेकिन वह अपराध की दुनिया में सफर कर रहा था और मौके के इंतजार में था। इधर अपराध की दुनिया को छोडकर सभी मामले में बरी होकर कुमोदी यादव ने समाज सेवा करने का मन बनाया। पत्नी को मुखिया बनाया, लेकिन उसकी राह आसान नहीं रही और पुराने वर्चस्व की लड़ाई में विरोधियों ने बदला लेने के लिए उसके भाई की हत्या कर दी।
