रंगरा प्रखंड में बाढ़ राहत घोटाले के आरोपी पूर्व अंचल अधिकारी तरुण कुमार केसरी और सप्लायर आशीष जायसवाल की जमानत पर शुक्रवार को जिला जज के कोर्ट में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने जमानत अर्जी नामंजूर कर दी। सीओ पिछले एक महीने से जेल में बंद हैं। वर्ष 2016 में आई भीषण बाढ़ के दौरान तत्कालीन डीएम के आदेश पर रंगरा प्रखंड के तत्कालीन सीओ तरुण केसरी ने नवगछिया के सप्लायर आशीष इंटरप्राइजेज से चूड़ा-गुड़ आदि सामग्री की खरीद की थी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सप्लायर आशीष जायसवाल ने एक लाख, 81 हजार, 405 रुपए का बिल दिया था, लेकिन अंचल के सीओ और नाजिर की मिलीभगत से सप्लायर को 29 सितंबर, 2016 को 21 लाख, 81 हजार, 405 रुपए चेक के जरिये भुगतान कर दिया गया। सप्लायर ने भी बिना देरी किए बैंक से रुपए की निकासी कर ली। जांच के दौरान 20 लाख रुपए की गड़बड़ी पकड़ी गई। इस दौरान सीओ का खरीक से सबौर अंचल कार्यालय में तबादला हो गया। तत्कालीन सीओ जितेन्द्र प्रसाद राम के बयान पर 13 सितंबर, 2017 को रंगरा थाने में बाढ़ राहत घोटाले की रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

पुलिस जांच में सीओ पर आरोप सही पाया गया। सीओ की पत्नी ने डीआईजी को पत्र लिखकर राशि गबन की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी, लेकिन इसी दौरान कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद रंगरा पुलिस ने सीओ तरुण केसरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। शुक्रवार को सीओ की ओर से अधिवक्ता सत्यानारायण पांडे ने बहस में भाग लिया और कोर्ट से जमानत की मांग की, लेकिन लोक अभियोजक सत्यनारायण प्रसाद साह ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि सीओ और सप्लायर ने निमलकर सरकारी राशि का गबन किया है। यह गंभीर मामला है। लोक अभियोजक ने बताया कि जिला जज ने सीओ और सप्लायर की जमानत अर्जी नामंजूर कर दि
