नवगछिया अनुमंडल क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए आदर्श स्थान है। गंगा व कोसी समेत क्षेत्र के विभिन्न तालाब व सुदूर खेत-बहियार में सालों भर 80 हजार से एक लाख की तक संख्या में प्रवासी पक्षियों का जुटान रहता है। पर्यावरण व वन विभाग की मानें तो भागलपुर व आसपास के जिले में हर साल पांच लाख से अधिक प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा लगता है। इनमें 150 से अधिक प्रवासी पक्षियों की प्रजाति शामिल होती है। जबकि पूरे बिहार में 350 से अधिक प्रजाति के पक्षी आते हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!नवगछिया के बिहपुर प्रखंड क्षेत्र में प्रवासी पक्षियों ने अपना नया बसेरा बनाया है। प्रखंड के गौरीपुर गांव के पास घटोरा झील में अब भी सर्दियों में रहने वाले पक्षी मौजूद हैं। पक्षी विशेषज्ञ ज्ञानचंद्र ज्ञानी ने बताया की नवगछिया में जगतपुर झील के बाद अब घटोरा झील पक्षियों के लिए बेहतर जगह है। उन्होंने बताया कि पूरे बिहार में इस झील जैसा अभी तक दूसरा झील नहीं है। यहां पक्षियों को पर्याप्त भोजन मिल जाता है। इस झील में यूरेशियन स्पूनबिल, नॉर्थरन पिनटेल, गडवाल, गार्गेनी, फेरोजेनस डक, रेड क्रेस्टेड पोचार्ड, लेसर व्हिस्टलिंग डक, ब्लैक टेल्ड गोडविट, कॉमन रेड शेंक, कॉमन ग्रीन शेंक, स्पॉटेड रेडशेंक आदि पक्षी देखे जा सकते हैं। घ टोरा झील पर्यटन स्थल से भी बेहतर है। ज्ञान चंद्र ज्ञानी ने बताया कि ये प्रवासी पक्षी रूस, अलास्का, मंगोलिया, तिब्बत, सेंट्रल एशिया जैसे ठंडे मुल्कों से यहां आकर विभिन्न हिस्सों में प्रवास करते हैं और तीन-चार महीनों तक यहां रहकर पुन: मार्च के अंत में अपने देश लौटने लगते हैं। यह सिलसिला वर्षों से चलता आ रहा है।
जिले में 250 से अधिक प्रजाति के हैं पक्षी ठंड के मौसम में प्रवासी पक्षियों का सबसे उपयुक्त स्थान विक्रमशिला गांगेय डाल्फिन अभ्यारण्य बन गया है। भागलपुर में अभी तक 250 से ज्यादा प्रजाति के स्थानीय व प्रवासी पक्षियों को देखा गया है, जो दूसरे जिलों की तुलना में प्रथम स्थान पर है। पक्षियों के कलरव से गांगेय डाल्फिन आश्रयणी क्षेत्र गुलजार है। डनलिन सहित सौ से अधिक प्रवासी पक्षियों का यहां डेरा रहता है।

