नवगछिया। शहर के विभिन्न हनुमान मंदिरों में गुरुवार को भगवान हनुमान की जयंती श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाई जाएगी। इसे लेकर सभी मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मंदिरों को सजाया गया है और विशेष पूजा-अर्चना के लिए भक्तों में उत्साह देखा जा रहा है।
पंचमुखी हनुमान मंदिर समिति ने बताया कि मंदिर में शाम 6 बजे से विशेष पूजा, 11 बार पाठ, महाआरती तथा शाम 7 बजे से रात 11 बजे तक जागरण का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
वहीं, स्टेशन चौक स्थित हनुमान मंदिर के संयोजक ने बताया कि यहां दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे और भगवान हनुमान को मिठाई का भोग अर्पित किया जाएगा। इसके साथ ही भक्तों के लिए पूजा-अर्चना और दर्शन की विशेष व्यवस्था की गई है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जयंती के दिन अंजनी पुत्र हनुमान का जन्म हुआ था। हनुमान जी को भगवान शिव का अंश माना जाता है, इसलिए उन्हें रुद्रावतार भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधिवत पूजा-अर्चना करने से बजरंगबली प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं।
हनुमान जी को सिंदूर क्यों चढ़ाया जाता है
पौराणिक कथाओं के अनुसार, वनवास से लौटने के बाद एक दिन माता सीता अपने कार्य में व्यस्त थीं। तभी हनुमान जी ने उनसे पूछा कि प्रभु श्रीराम को सबसे अधिक क्या प्रिय है। इस पर माता सीता ने कहा कि प्रभु श्रीराम किसी वस्तु से मोह नहीं रखते और सभी से समान रूप से प्रसन्न रहते हैं।
इसी दौरान हनुमान जी की नजर माता सीता के सिंदूर पर पड़ी। उन्होंने पूछा कि आप यह सिंदूर क्यों लगाती हैं। माता सीता ने बताया कि यह सुहाग की निशानी है और इसे लगाने से प्रभु श्रीराम प्रसन्न होते हैं।
यह सुनते ही हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया और भगवान राम के सामने पहुंच गए। जब श्रीराम ने इसका कारण पूछा, तो हनुमान जी ने कहा कि जब माता सीता के थोड़े से सिंदूर से आप प्रसन्न होते हैं, तो मेरे पूरे शरीर पर सिंदूर देखकर आप और अधिक प्रसन्न होंगे।
हनुमान जी की अटूट भक्ति और प्रेम को देखकर भगवान श्रीराम अत्यंत प्रसन्न हुए। तभी से हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करने की परंपरा प्रचलित मानी जाती है।















Leave a Reply