आमतौर पर बेली डांस लड़कियों का क्षेत्र माना जाता है। लेकिन बेली डांस के क्षेत्र में अब लड़के भी पीछे नहीं हैं। इसमें बिहार के पहले बेली डांसर मानव झा अपना परचम लहरा रहे हैं। पुरुष बेली डांसर होने की वजह से उन्हें कई उप नामों से पुकारा जाता है। लोग ताना मारते हैं। इन सभी परेशानियों का सामना करते हुए कटिहार के मानव झा बिहार के पहले मेल बेली डांसर बनें। कल तक जो मजाक उड़ाते थे, वो आज इनके साथ सेल्फी लेने के लिए लालायित रहते हैं। आइए, जानते हैं मानव के बेली डांसर बनने के पीछे की कहानी…
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एक हादसे ने मार्शल आर्टिस्ट को बनाया बेली डांसर
बिहार के पहले मेल बैली डांसर मानव झा कटिहार के कुरसेला प्रखंड अंतर्गत ट्रिमोहिनी संगम कटरिया गांव के रहने वाले हैं। मानव के पिता मनोज झा उर्फ संगम बाबा पेशे से किसान हैं और मां गुड़िया झा एक साधारण गृहिणी है। मार्शल आर्ट्स में महारथ प्राप्त मानव झा के बेली डांसर बनने की कहानी काफी दिलचस्प है। मार्शल आर्ट्स फाइट के दौरान हुए एक हादसे के बाद मानव अपने इलाज बेले ट्रीटमेंट को ही अपना करियर बना लिया।
10 वीं पास मानव को बेली डांस का जुनून इस हद तक चढ़ा कि उन्होंने दिन रात एक कर बिना किसी गुरु के यूट्यूब और सोशल मीडिया के सहारे इस कला में महारथ हासिल की। हालांकि बाद में अपनी इस डांस कला को और बेहतर तरीके से तराशने के लिए मानव कटिहार से दिल्ली पहुंचे। जहां वे भारत के सबसे बड़े बेली डांस स्कूल बंजारा स्कूल आफ डांस में एडमिशन लिया। इस स्कूल में वे बेली डांस जगत की जानी मानी कलाकार मेहर मलिक से बेली डांस में निपुणता हासिल की।


सामाजिक तानों से हुआ सामना
मानव को शुरुआती दौर से लेकर अब तक पुरुष होने के बावजूद महिलाओं के विशेष दबदबा रखने वाले संयुक्त शैली में झुकाव से कई तरह का सामाजिक तानाबाना भी सुनना पड़ा। इन सबका सामना करते हुए मानव ने बेली डांस को अपना कैरियर बना लिया है। मानव ने अपना लुक भी कुछ ऐसा बनाया हे कि उनके डांस को देखकर महिला पुरुष में फर्क करने में लोग अक्सर फंस जाते हैं।

जीवन में कुछ ऐसी परिस्थिति आई जिसमें बैली डांस जीवन का अंग बन गया
मानव ने बताया कि वे बेली डांसर से पहले वर्ष 2008 में मार्शल आर्ट्स की शिक्षा ले रहे थे। समय के साथ इस कला में मानव ने अपना अच्छा मुकाम बनाया। मार्शल आर्ट्स के चैंपियनशिप का खिताब भी वे जीत चुके हैं। साल 2013 में फाइट के दौरान मानव को पेट की नाभि के पास चोट लगी। इस चोट के कारण वे फिर फाइट नहीं कर पाए। किसान परिवार में जन्मे मानव ने बताया कि- उस समय वे आर्थिक तंगी से भी जूझ रहे थे। इसके कारण इस पेट की चोट से उत्पन्न परेशानी में मानव का बेहतर इलाज कर पाना बहुत ही मुश्किल था।
मानव ने बताया कि- पिता और बड़े भाई मोहित ने उस समय मानव का इलाज कराया। डॉक्टरी इलाज के 1 नुस्खे बेले ट्रीटमेंट ने मानव को आज बैली डांसर बना दिया। मानव कहते है कि यह खास नृत्य अब मेरे जेहन में बस गया है।

सरकार की पहल की है आवश्यकता
मानव ने कहा कि इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए बड़े-बड़े मंचों तक पहुंच बनाने के लिए काबिलियत के साथ-साथ आर्थिक स्थिति भी बेहतर होनी चाहिए। फिलहाल मानव और उसका परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। अगर सरकार उन्हें उनकी इस काबिलियत को देखकर उसे पहचान कर इस क्षेत्र में आगे बढ़ने में उसका मदद करें तो वह इस डांस के माध्यम से अपने राज्य बिहार का परचम पूरे भारत के साथ-साथ अन्य देशों में भी लहरा सकता है।

इस खास नृत्य शैली के विषय में मानव बताते हैं कि भारतीय क्लासिकल नृत्य की तरह इस नृत्य से शरीर का फिटनेस को बरकरार रखा जा सकता है। खासकर यह एक ऐसा नृत्य है जिसमें कोई गर्भवती महिला भी गर्भधारण के दौरान भी इस नृत्य को करने में उन्हें कोई परेशानी नहीं हो सकती है।
