नवगछिया : नवगछिया के बहुचर्चित व प्रसिद्ध तेतरी स्थित दुर्गा मैया के बारे में कहा जाता है कि यहां से आज तक कोई खाली नहीं गया. यही कारण है माता का वैभव दिन दूना रात चौगुना बढ़ रहा है. माता के मंदिर माता का इतिहास 250 वर्ष पुराना है. आचार्य मन्नू पंडित समेत ग्रामीण बताते है तेतरी गांव में काजीकोरैया से एक मेढ़ यहां पर बाढ़ के पानी में बह कर चला गया. जब काजीकोरैया के लोग मेढ़ को उठाने आये तो मेढ़ टस से मस नहीं हुआ.
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!और जब तेतरी के कुछ लोगों ने ही मेढ़ को उठाने का प्रयास किया तो मेढ़ उठ गया. फिर कलबलिया धार के निकट ही मेढ़ को स्थापित किया गया और पूजा अर्चना शुरू कर दी गयी. तब से लेकर अब तक माता की पूजा अर्चना की जा रही है. माता के इस मंदिर में वैदिक विधि से माता की पूजा अर्चना की जाती है. माता के इस मंदिर में बली देने की प्रथा नहीं है. यहां माता को कोढला फल की बाली प्रदान की जाती है.


भक्तों ने माता के दूसरे स्वरूप माता ब्रह्मचारणी की पूजा
नवगछिया : शारदीय नवरात्र में माता शक्ति की आराधना में भक्त लीन हो गए हैं. माता की भक्ति के बीच मंदिर में हो रहा दिव्य मंत्रों के उच्चारण व माता मंदिर के घंटियों से निकलने वाले स्वर पूरे वातावरण को भक्तिमय कर रहा है. सोमवार को माता के भक्तों ने माता के दूसरे स्वरूप माता ब्रह्मचारणी की पूजा अर्चना की. माता के मंदिर में सुबह से देर शाम तक भक्तों की भीड़ माता की आराधना में लगे हुए थे.
नवगछिया सहित आस पास के माता के मंदिर मव महिलाओं एवं युवतियों ने माता को संध्या अर्पित किया. नवगछिया शहर स्थिति माता के मंदिर में माता के संध्या आरती में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी थी. नवरात्र को लेकर मंदिर प्रांगण में विद्वान आचार्य के द्वारा भागवत कथा वाचन किया जा रहा है. बारिश के बीच श्रद्धालु कथा वाचन का श्रवण कर रहे हैं.

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