संतमत सत्संग का 36 वां वार्षिक अधिवेशन रंगरा के सधुआ चापर मे शुरू-Naugachia News

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नवगछिया :- रंगरा प्रखंड क्षेत्र के सधुआ चापर में नवगछिया अनुमंडलीय संतमत सत्संग का 36 वां दो दिवसीय अधिवेशन बुधवार से शुरू हो गया जो आगामी 9 नवंबर तक चलेगा इस कार्यक्रम का शुभारंभ प्रात कालीन सत्संग के माध्यम से प्रातः 5 बजे शुरू हुआ. इसके बाद मंचासीन संतों का आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं पंचायत के मुखिया मंजू देवी, पूर्व मुखिया रघुवंश प्रसाद सिंह “राकेश”, सेवानिवृत्त शिक्षक योगेंद्र यादव , महावीर सिंह मदरौनी इंटर स्तरीय विद्यालय के प्राचार्य अवधेश पासवान एवं संतमत सत्संग समिति के संयोजक सेवानिवृत्त शिक्षक सुबोध यादव द्वारा माल्यार्पण किया गया. इसके बाद महावीर सिंह मदरौनी इंटर स्तरीय विद्यालय चापर हाट की छात्रा प्रियदर्शनी, पूजा, एवं पुष्पा कुमारी द्वारा स्वागत गान प्रस्तुत किया गया.

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अनुमंडलीय सत्संग समिति के स्वागताध्यक्ष गौरी शंकर पंडित के द्वारा स्वागत भाषण प्रस्तुत करने के बाद स्तुति विनती के साथ ही संतमत सत्संग का विधिवत शुभारंभ हो गया. इस अवसर पर प्रधान आचार्य पूज्य श्री स्वामी चतुरानंद जी महाराज , स्वामी वेदानंद जी महाराज, स्वामी योगानंद जी महाराज के अलावा संत प्रेमानंद जी , श्याम सुंदर ब्रहमचारी, स्वामी शाही शरण बाबा एवं स्वामी सुभाषानंद महाराज के द्वारा प्रवचन किया गया. इस मौके पर मुख्य रुप से अनुमंडलीय उपाध्यक्ष मुरली मनोहर शर्मा, सचिव श्रवण बिहारी, उप सचिव सुशील पोद्दार, कोषाध्यक्ष कपिल देव रजक, संरक्षक बाबूलाल यादव मुख्य रूप से मौजूद थे.

सत्संग स्थल पर मौजूद हजारों महिला पुरुष सत्संग प्रेमियों ने मौजूद मंचासीन संतो की अमृत वाणी की धारा में डुबकी लगाई. कार्यक्रम को सफल बनाने में सैकड़ों कार्यकर्ता लगे हुए थे. आत्म चिंतन एवम ध्यानाभ्यास से ही अमृत तत्व की प्राप्ति होती है. स्वामी चतुरानंद जी महाराज ने कहा कि संसार के समस्त प्राणियों में मानव सर्वश्रेष्ठ प्राणी है. इसलिए इन्हें सभी जीवों के प्रति दया, प्रेम एवं करुणा का भाव रखना चाहिए संयमित भोजन संयमित विचार और संयमित व्यवहार करनी चाहिए. संतमत संसार के सभी जीवो को सुखी देखना चाहता है. सुखी होने के लिए प्रत्येक दिन मानव को आत्म चिंतन एवं ध्यानाभ्यास करना चाहिए. इससे ही अमृत तत्व की प्राप्ति होती है.

अगर मनुष्य पंचशील का पालन करें तो मांगलिक समाज की स्थापना हो जाएगी. इससे मानवता का विकास संभव हो सकेगा. उक्त बातें आचार्य स्वामी चतुरानंद जी महाराज ने नवगछिया अनुमंडलीय 36 वें वार्षिक अधिवेशन में सत्संग के दौरान कही साथ ही उन्होंने कहा कि मानव शरीर के अंदर अनंत स्वरुप हैं जिसे पहचानने की आवश्यकता है. मानव के अंदर विराजमान आत्मा ही असली अमृत है. इसे कठोर तप एवं सत्संग के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है.

परमात्मा एक शक्ति एवं एक ऊर्जा है जिसके माध्यम से संसार के जीव जंतु क्रियाशील हैं. वही दूसरी ओर अपने प्रवचन के दौरान स्वामी वेदानंद जी महाराज ने गुरु की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु का दर्जा भगवान से भी ऊपर है. गुरू बनने की क्षमता खुद मानव के अंदर है जो निरंतर ध्यानाभ्यास और गुढ चिंतन से प्राप्त किया जा सकता है. इसके अलावा उन्होंने कहा कि संकीर्ण स्वार्थपरता ही हमारे दुख का कारण है. इसलिए मनुष्य को संकीर्ण भाव से ऊपर उठना चाहिए.