पुरानी खंडहर के लिए प्रसिद्ध है नारायणपुर का ये विद्यालय, कभी भी हो सकता भीषण हादसा

बिहपुर

नारायणपुर: पुष्पराज कुमार, जिस विद्यालय से पढ़कर बड़े-बड़े पोस्ट पर कार्य रहे हो और उसी विद्यालय की स्थिति नाजुक हो तो बात ही कुछ अलग है. प्रखण्ड के उच्च विद्यालय नारायणपुर में कभी भी भीषण हादसे का शिकार हो सकती है. इसी विद्यालय से शायला खान ने जिला टॉप टेन में दूसरे स्थान व सोनाली कुमारी ने छठे स्थान लाकर न केवल प्रखंड का नाम रोशन किया बल्कि विद्यालय का भी अपने स्वाभिमान से एक कदम आगे की ओर ले जाने में अपनी भूमिका निभाया. उसी विद्यालय में पिछले कई महीनों से छत गिरने को लेकर डरे-सहमे रहते है. छात्र पढ़ाई करके विद्यालय से निकल कर ही चैन की श्वास भरते है मानो जैसे बड़ी मुसीबत से बाहर निकला हो. आपको बताते चले कि पिछले 6 दिसम्बर को एक कमरे की छत का मलबा उस वक्त गिरा जब कमरे के अंदर विद्यालय के शिक्षक विवेकानंद रजक व रामानंद पासवान बैठकर स्कूल का काम-काज निपटा रहे थे. तभी अचानक पास में छत का मलबा पास में जा गिरा और दोनों इस हादसे से बाल-बाल बचे थे. पास में पढ़ाई कर रहे छात्र भी बगल वाले कमरे से बाहर निकल गये. वही इसे लेकर ग्रामीणों में एक बड़ी जनाक्रोश की स्थिति देखी जा रही है. विद्यालय में कभी भी ताला बन्दी कर पढ़ायी बाधित कर सकती है, परंतु ऐसे जर्जर स्थिति में अपने छात्रों को विद्यालय नही भेज सकते. वही विद्यालय को बार बार उच्च अधिकारी से छात्रों की उपस्थिति को लेकर दबाब बनाया जाता है और ऐसे स्थिति को देखकर दूसरे दिनों से विद्यार्थियों का विद्यालय आना बंद हो जाता है आये भी कैसे इस बड़ी हादसे का शिकार होने. वही एक तरफ सरकार द्वारा हरेक सार्वजनिक क्षेत्रो में पीने योग्य पानी की व्यवस्था के लिए बड़े-बड़े कदम उठा रहे है और वही एक तरफ शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाला विद्यालय पीने योग्य पानी से विहीन दिख रहा है. एक तरफ पानी की समस्या वही दूसरी ओर जर्जर स्थिति भवन. कई बार इस समस्या को लेकर अखबारों, सोशल साइट्स के द्वारा बताने का कार्य करते है परंतु अधिकारी कानों में तेल रुई डाल कर चैन की नींद जो ले रहे है जगे तब न. वही इस विद्यालय में कुल चार चापाकल है पर सब के सब बेकार. दो चापाकल का हथरा टूटा पड़ा है, एक चापाकल दिखने में पूरा ठीक है पर चलता ही नही है और एक चापाकल में बालू निकलने के कारण पीना पसंद नही करते. इस वजह से विद्यार्थियों को अगर पानी पीना हो तो विद्यालय के बाहर पास के थाना में लगे चापाकल जाते है या पास के बीएसएनल एक्सचेंज के चापाकल या फिर पास में दुकान से दो रुपये में पानी का पैकेट लेकर प्यास बुझाते है.

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?क्या कहते है प्राचार्य:-
विद्यालय के प्रधानाध्यापक शिवेश झा ने बताया कि इस मामले को लेकर कई उच्च अधिकारी से अवगत कराया, परंतु हर आश्वासन का महत्व नही रहा. वही कई शिक्षक इस घटना से बाल-बाल बचे है. कभी भी बड़े हादसे का शिकार विद्यालय के शिक्षकों या विद्यालय के छात्रों के ऊपर घटना हो सकती है.

?क्या कहते है छात्र:-
छात्र राहुल कुमार ने बताया कि कुछ दिन पहले भवन का मालवा गिरा था जिसमें विद्यालय के दो शिक्षक और पढ़ायी कर रहे छात्र भी जख्मी होने से बचे. यह घटना ध्यान में आते ही उस स्थान पर जाने को लेकर डर बना रहता है फिर भी पढ़ाई करने विद्यालय आना पड़ता है.

?क्या कहते है ग्रामीण:-
स्थानीय अजय रविदास एवं मधुर मिलन नायक ने कहा कि इस घटना को लेकर अधिकारियों की जितनी निंदा की जाए शायद कम ही होगी. ऊपर से विद्यार्थियों को विद्यालय जाने को लेकर कई तरह के दबाब बनाया जाता है परंतु विद्यालय की सुरक्षा को लेकर कोई ध्यान ही नही देते और तो और विद्यालय में एक भी चापाकल ठीक नही है कुल मिलाकर यह कहा जाए कि विद्यालय में सरकार आने से रोकती है और ऊपर से दिखवा के लिए लाख लाख वायदे करके जनता को ठगने का कार्य कर रही है. अगर वही इस समस्या को लेकर जल्द सुरक्षित का कार्य नही करती है तो ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए विद्यालय में जल्द तालाबंदी कर आक्रोश व्यक्त की जाएगी.