मुहर्रम के दिन दुर्गा प्रतिमा विसर्जन की अनुमति न देने के पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले को कोलकाता हाईकोर्ट ने गुरुवार को खारिज कर दिया. अदालत ने इस बारे में कल भी सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के इस फैसले की तीखी आलोचना की थी. हालांकि हाईकोर्ट के इस फैसले पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि कोई उनकी गर्दन काट सकता है, मगर यह नहीं बता सकता कि उन्हें क्या करना है. उन्होंने हालांकि साफ किया है कि वे राज्य में शांति बहाली के लिए जरुरी सभी कदम उठाएंगी.
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!गुरुवार को मसले की सुनवाई करते हुए कार्यवाहक चीफ जस्टिस राकेश तिवारी और जस्टिस हरीश टंडन की खंडपीठ ने कहा कि मुहर्रम के दिन लोग रात 12 बजे तक मूर्ति विसर्जित कर सकेंगे. अदालत ने इसके लिए पुलिस को सारे इंतजाम करने को कहा है. उसने पुलिस से कहा कि वह दोनों समुदायों के लोगों के लिए अलग-अलग रास्ता तैयार करे. साथ ही, विज्ञापनों के जरिये लोगों को प्रतिमा विसर्जन और ताजिये के लिए तय किए गए रूटों की जानकारी दे.

अदालत ने राज्य सरकार पर आज भी सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में राज्य सरकार ने बिना किसी ठोस आधार के कार्रवाई की है. उसने आगे कहा कि सरकार बहुत ज्यादा क्षमतावान हो सकती है लेकिन वह चांद और कैलेंडर की गति नहीं रोक सकती.
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि उन पर लोग तुष्टीकरण का तब आरोप नहीं लगाते जब वे हिंदुओं के पर्व को मनाती हैं.


उन्होंने कहा कि यदि मुस्लिमों को सहूलियतें देती हैं तो उन पर तुष्टीकरण का आरोप लगता है. ममता बनर्जी ने आगे कहा कि यदि यह तुष्टीकरण है तो वे आगे भी ऐसा करती रहेंगी. विपक्षी भाजपा ने प्रतिमा विसर्जन पर लगी रोक के बाद उन पर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाया था.
