नवगछिया: डॉ एन एल सिन्हा अदम्य साहस एवं प्रतिभा के धनी थे जिन्होंने डॉ काउन्ट सीजर मैटी द्वारा आविष्कृत प्योर हर्बल चिकित्सा पद्धति इलेक्ट्रो होम्योपैथी को 1920 ई में भारत देश के कानपुर शहर में लाया ।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!उक्त बातें डॉ एन एल सिन्हा जयन्ती सह राष्ट्रीय इलेक्ट्रो होम्योपैथिक दिवस के अवसर पर इंस्टीच्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिकल साइन्स नारायणपुर के कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए मैटी इलेक्ट्रो होम्योपैथिक मेडिकल कौंसिल के निदेशक डॉ सुभाष कुमार विद्यार्थी नें कहा ।
डॉ विद्यार्थी नें कहा कि डॉ एन एल सिन्हा के अथक प्रयास से भारत में इलेक्ट्रो होम्योपैथी का प्रचार – प्रसार संभव हो पाया है , इनकी कार्यकुशलता एवं इलेक्ट्रो होम्योपैथी के प्रति सच्ची निष्ठा के कारण भारत सरकार ने इन्हें मसीह – उल- हिन्द की उपाधि देकर सम्मानित किया । इस अवसर पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इलेक्ट्रो होम्योपैथी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ रजनीश कुमार झा ने कहा कि जिस लगन एवं सेवाभाव से डॉ एन एल सिन्हा साहब ने इलेक्ट्रो होम्योपैथी का प्रचार – प्रसार भारत में किया हम चिकित्सक बन्धुओं को भी उनको अपना आदर्श मानकर इलेक्ट्रो होम्योपैथी को जन – जन तक प्रचारित कर उन्हें इसकी दवाई से रोगमुक्त करने की सेवा करने की आवश्यकता है ।

इस अवसर पर उपस्थित समाजसेवी अर्जुन कुमार मंडल ने कहा कि हमने भी इलेक्ट्रो होम्योपैथी की औषधियों का चमत्कार डॉ विद्यार्थी साहब के द्वारा दिये कई रोगियों पर देखा है । वास्तव में इलेक्ट्रो होम्योपैथी की दवा असाध्य रोगों खासकर चर्म रोग , बावासीर , दम्मा , वातरोग , स्टोन को बिल्कुल समूल ठीक कर देती है । इन्होंने क्षेत्रीय आम लोगों को इलेक्ट्रो होम्योपैथी से जुड़ने का आह्वान किया ।
