रोचक : कश्मीरियों को इंजीनियर बना रहे IIT पासआउट ये बिहारी, जानिए

भागलपुर / पटना

पटना के तीन आइआइटी पासआउट 2012 से कश्मीर में रहने वाले छात्रों के लिए इंजीनियरिंग की कोचिंग चला रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि ये सभी आइआइटी पास छात्र लाखों रूपये के पैकेज की नौकरी छोड़कर यह काम कर रहे हैं। तीन साल पहले 4 लड़कों को पढ़ाने से शुरू हुआ इनका कारवां लगातार बढ़ रहा है। आज करीब 200 से ज्‍यादा छात्र इसे पढ़ने आते हैं। कड़कड़ाती ठंड हो, लगातार बर्फबारी हो रही हो या फिर गोलियों की तड़तडाहट, छात्र यहां पर अपना क्लास नहीं छोड़ते।

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पटना के रहने वाले इंबिसात अहमद, दरभंगा के रहने वाले सलमान शाहिद और मुजफ्फरपुर के रहने वाले सैफई करीम कश्मीर में रहने वाले मुबीन मसूदी के साथ मिलकर 2012 से कश्मीर में रहने वाले छात्रों के लिए इंजीनियरिंग का कोचिंग क्लासेज चला रहे हैं। इंजीनियरिंग का क्लास चलाने वाले ये तीनों बिहारी ख़ुद भी आईआईटी पासआउट हैं।

इंबिसात अहमद, सलमान शाहिद तो आईआईटी खड़गपुर के छात्र रहे थे, तो सैफई करीम डीटीयू से अपनी पढ़ाई पूरी की थी। राइज कोचिंग सेंटर के नाम से ये तीनों बिहारी ने अपना क्लास शुरू किया। लेकिन शुरू में तो इन्हें बड़ी मुश्किल से 4 स्टूडेंट्स मिले। 2013 की परीक्षा में ये चारों ने जब बाजी मार ली तो लोगों का इनके प्रति नजरिया ही बदल गया।

यहां पर पढ़ने वाले 50 प्रतिशत से ज्यादा स्टूडेंट्स आईआईटी या फिर एनआईटी में अपना परचम लहरा रहे हैं। इनके कोचिंग में पढ़ने वाले एक स्टूडेंट्स को प्रिंसटॉन यूनिवर्सिटी से दाखिले का ऑफर मिला है। कश्मीर घाटी का ये पहला ऐसा छात्र हैं जिन्हें प्रिंसटॉन यूनिवर्सिटी से दाखिले का ऑफर मिला है।

3 दोस्तों का अनोखा सफर

तीन बिहारी दोस्त घुमाने फिरने अक्सर श्रीनगर आया करते थे। इंबिसात कहते हैं कि मैं अक्सर छुट्टियों में दोस्तों के साथ कश्मीर आता था। 2012 में भी मैं आया था। कश्मीर में हमने पाया कि यहाँ छात्रों में पढ़ने की गजब की ललक है। इन सभी के अंदर काफ़ी हुनर है। लेकिन जानकारी और जागरूकता की कमी है। बच्चे वो नहीं कर पा रहे हैं जो ये कर सकते हैं। इस बात को हमने एक प्रॉब्लम की तरह लिया और मन बनाया कि जब हम ग्रेजुएट हो जाएंगे तो यहाँ हम फुल टाइम क्लासेज शुरू करेंगे।

सफलता का परचम लहरा रहे छात्र

2016 में भी इस कोचिंग सेंटर से चार छात्रों ने आईआईटी क्लियर किया था जबकि 30 से ज़्यादा छात्रों ने एनआईआईटी। इसके अलावा इसी सेंटर से पढ़े एक और छात्र 19 साल के शेख़ मुअज्जिन को एक बड़ी कामयाबी मिली। मुअज्जिन को अमरीका के प्रिंसटॉन यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग विभाग से एडमिशन का ऑफर मिला। वे कश्मीर घाटी के पहले ऐसे छात्र हैं जिन्हें प्रिंसटॉन यूनिवर्सिटी से दाखिले का ऑफर मिला है।