बिहार पंचायत चुनाव में बॉयोमैट्रिक मशीन के इस्तेमाल ने बोगस वोटर्स को तो रोक दिया, लेकिन इसने बैंकिंग फ्रॉड को न्योता दे दिया है। यह सवाल इसलिए खड़ा हो रहा है, क्योंकि मुंगेर में 29 नवंबर को हुए मतदान में यह मामला सामने आ चुका है। जहां वोटिंग के लगभग 1 घंटे बाद 12 वोटर्स के अकाउंट से पैसे निकाल लिए गए। हालांकि, इस मामले में आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन इस घटना ने कई सवाल खड़ा कर दिए हैं। इसी सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश भास्कर ने साइबर एक्सपर्ट से बात कर की। भास्कर एक्सप्लेनर से समझिए बॉयोमैट्रिक से क्या खतरा होता है, और हम क्या उपाय कर सकते हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बॉयोमैट्रिक से ली जाने वाली फिंगर प्रिंट का हो सकता है बैंकिंग फ्रॉड में इस्तेमाल
साइबर एक्सपर्ट संतोष प्रसाद ने भास्कर को बताया, बॉयोमैट्रिक मशीन ऑपरेट कर रहा शख्स अगर चाहे तो वोटर के फिंगर प्रिंट को सुरक्षित कर सकता है और उसका वह अपने फायदे के लिए इस्तेमाल भी कर सकता है। मुंगेर में जो घटना हुई, उसमें ऐसी ही तकनीक का सहारा लिया गया।’

सिलिका जेल का होता है इस्तेमाल
संतोष प्रसाद के मुताबिक, ऐसे मामलों में जब बॉयोमैट्रिक मशीन पर बैठा व्यक्ति फ्रॉड के मामलों में संलग्न होता है तो वह इसके लिए सिलिका जेल का इस्तेमाल करता है। सिलिका एक बेहद पारदर्शी जेल होता है, जो बॉयोमैट्रिक मशीन की फिंगर प्रिंट वाले एरिया पर लगा दिया जाता है। इसके बाद जब कोई व्यक्ति इस मशीन पर अपनी उंगली रखता है तो उसका फिंगर प्रिंट जेल पर प्रिंट हो जाता है। उसके बाद यह कहते हुए कि आपका फिंगर प्रिंट नहीं आया मशीन पर बैठा व्यक्ति बॉयोमैट्रिक मशीन को सामने से हटा कर धीरे से उस पर लगा सिलिका जेल का लेयर निकाल लेता है। उसके बाद कपड़े से पोछकर यह दिखाने की कोशिश करता है कि बॉयोमैट्रिक पर लगा धूल के कारण वोटर का फिंगर प्रिंट एक्सेस नहीं हो सका। वोटर को दोबारा बॉयोमैट्रिक पर उंगली रखने के लिए कहा जाता है।
सिलिका जेल पर बने फिंगर प्रिंट को सुरक्षित रख किया जाता है फ्रॉड
उन्होंने बताया, ‘मनी ट्रांजेक्शन की कई सारी नई तकनीकों में सिर्फ फिंगर प्रिंट और आधार एक्सेस के जरिए ही पैसों की लेनदेन होती है। यही वजह है कि फिंगर प्रिंट का एक्सेस मिलने से धोखाधड़ी करने वाले लोगों को आसानी से किसी भी व्यक्ति का पूरा डिटेल मिल सकता है। फिंगर प्रिंट के जरिए फ्रॉड करनेवाले आधार नंबर की जानकारी प्राप्त कर लेते हैं और उस आधार नंबर से जुड़े विभिन्न बैंक खातों की भी जानकारी निकाल लेते हैं। एक बार बैंक खातों की जानकारी होने के बाद धोखाधड़ी करने वाले लोग सिलिका जेल पर बने फिंगर प्रिंट का पैसे निकासी के लिए उपयोग करने लगते हैं। जरूरी नहीं कि ऐसे मामलों में फ्रॉड तुरंत ही हो जाए।’
साइबर एक्सपर्ट संतोष प्रसाद के मुताबिक, अगर फ्रॉड करने वाले चाहे तो बेहद आसानी से सिलिका जेल पर लगे आपके फिंगर प्रिंट को महीनों तक सुरक्षित रख सकते हैं और ऐसे में हो सकता है आपके साथ महीनों बाद ही यह फ्रॉड हो।
बॉयोमैट्रिक संचालन के लिए बैठे व्यक्ति पर रखी जाएगी कड़ी नजर : आयोग
मुंगेर में हुई घटना और पंचायत चुनाव में बॉयोमैट्रिक के इस्तेमाल से सामने आए बैंकिंग फ्रॉड के खतरे पर भास्कर ने राज्य निर्वाचन आयोग से भी सवाल पूछा। राज्य निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त दीपक प्रसाद ने बताया, ‘इस तरह के बेहद कम मामले सामने आए हैं। अब इस पर कड़ी नजर रखी जाएगी कि बॉयोमैट्रिक संचालन के लिए बैठे व्यक्ति के पास कहीं कोई अपना गैजेट तो नहीं। मुंगेर में जिस युवक ने फ्रॉड की उसने इसके लिए एक अलग मशीन रखा था जिसके जरिए उसने इस काम को अंजाम दिया था।’
