सार्वजनिक जगहों पर मोबाइल चार्ज करना खतरनाक, खाली हो सकता है बैंक खाता; क्या है जूस जैकिंग?

भागलपुर / पटना

अक्सर हम मोबाइल की बैटरी कम होने के बाद सार्वजनिक स्थानों पर अपने मोबाइल को चार्ज करते हैं। इंटरनेट कैफे, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, शॉपिंग मॉल, अस्पताल व हवाई अड्डों पर यूएसबी चार्जिंग पोर्ट उपलब्ध कराए जाते हैं। इन पब्लिक प्लेस पर मोबाइल चार्ज करना लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है। स्मार्टफोन से महत्वपूर्ण डेटा लीक हो सकता है। लोगों के बैंक खाते से भारी भरकम रकम की निकासी हो सकती है। इसके अलावा अन्य गोपनीय जानकारी भी चोरी हो सकती है। ऐसे में सार्वजनिक जगहों पर मोबाइल चार्ज करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। हाल के दिनों में यह बात सामने आई है कि ‘जूस जैकिंग’ के जरिए लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। इससे बचाव के लिए सावधान रहने की जरूरत है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी इसको लेकर एडवायजरी जारी की है।

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क्या है जूस जैकिंग, ऐसे समझिए

जब हम पब्लिक प्लेस पर मोबाइल चार्ज करते हैं तो साइबर अपराधी उस चार्जिंग पोर्ट में एक प्रोग्राम इंस्टॉल कर सकते हैं। लोगों के मोबाइल हैक कर सकते हैं। मोबाइल में ‘मैलवेयर’ इंस्टॉल करके मोबाइल की जानकारी भी आसानी से चुरा सकते हैं। मैलवेयर साइबर अपराधी या हैकर को मोबाइल की पूरी स्क्रीन यानी उपयोगकर्ता द्वारा प्राप्त ओटीपी, उसका नाम, टाइप किया गया पासवर्ड, ऑनलाइन बैंकिंग आदि तक पहुंचने की अनुमति देता है। आपका बैंक बैलेंस क्या है? आप किस जगह पर हैं? आप क्या करते हैं? हैकर आसानी से इसका पता लगा सकता है।

हैदराबाद, जयपुर, ओडिशा में सामने आ चुके ‘जूस जैकिंग’ के मामले

साइबर चोर हर दिन नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। कोई लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर ऑनलाइन फ्रॉड कर रहा है तो कोई व्हाट्सएप पर मैसेज या लिंक भेजकर लोगों को चूना लगा रहा है। यूट्यूब वीडियो लाइक करने के नाम पर भी लोगों से ऑनलाइन ठगी की जा रही है। हैदराबाद, जयपुर व ओडिशा में ‘जूस जैकिंग’ के मामले सामने आ चुके हैं। जांच के बाद पता चला था कि इन तीनों मामलों के पीड़ितों ने एयरपोर्ट व शॉपिंग मॉल में लगे चार्जिंग पोर्ट से अपना मोबाइल चार्ज किया था। इसी दौरान उनका डेटा साइबर अपराधियों ने हैक किया और खाते से पैसे निकाल लिए।

सार्वजनिक जगहों पर लगे चार्जिंग पोर्ट के उपयोग से बचें

इस बाबत साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट दीपक कुमार ने बताया कि सार्वजनिक जगहों पर लगे चार्जिंग पोर्ट में साइबर चोर पहले से सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करके रखते हैं। जब तक कोई मोबाइल उस पोर्ट में चार्ज के लिए लगा रहता है, तब तक मोबाइल से डेटा कॉपी होता रहता है। कई मामलों में अकाउंट से पैसे निकाल लिये जाने की बात भी सामने आई है। साइबर क्रिमिनिल मोबाइल हैक कर लोगों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग तक करते रहते हैं। ऐसे में लोगों के मोबाइल पर हैकर्स का पूरा कंट्रोल हो जाता है। हालांकि स्थानीय स्तर पर ऐसी घटना नहीं हुई है। सार्वजनिक जगहों पर लगे चार्जिंग पोर्ट का उपयोग करने से बचना चाहिए।

भागलपुर और लखीसराय में साइबर क्राइम के कई मामले

बिहार के भागलपुर जिले में बीते 33 दिनों में साइबर ठगों ने शहरवासियों के 13,66,138 रुपये उड़ा लिए। इस बाबत साइबर थाना में 9 जून से 12 जुलाई के बीच साइबर ठगी के 15 केस दर्ज हुए। साइबर ठगों ने खलीफाबाग के सुमित से सर्वाधिक 1.76 लाख रुपये की ठगी की। जबकि सबौर की जूली से 1.75 लाख, लोदीपुर के अमन कुमार से 1.18 लाख रुपये की ठगी हुई है। साइबर अपराधियों ने विदेशी महिला बन पैसे की मांग की। अश्लील वीडियो कॉल कर फंसाया और पैसे उड़ाए। वहीं लखीसराय के चानन में केवाईसी अपडेट करने के नाम पर साइबर ठगों ने पीड़ित को 50 हजार का चूना लगा दिया। चुरामन बीघा के एक युवक के पोस्ट ऑफिस के खाते से निकासी कर ली गई।

आरबीआई ने जारी की ये एडवायजरी

– अपने मोबाइल या अन्य उपकरणों को चार्ज करने के लिए सार्वजनिक चार्जिंग पोर्ट का इस्तेमाल करने से बचें।
– उपकरण को चार्ज करने के लिए अपने पावर बैंक का इस्तेमाल करें।
– यूएसबी डेटा ब्लॉकर्स का उपयोग करें, एसी डाटा केबल का उपयोग करें, जो सिर्फ चार्जिंग के लिए काम आता है।
– अपने उपकरण के ऑटोमेटिक कनेक्शन बंद रखें।
– सिस्टम को एंटीवायरस सॉफ्टवेयर के जरिए अपडेट करते रहें। फोन को लेटेस्ट ऑपरेटिंग वर्जन पर अपडेट रखें।
– सार्वजनिक वाई-फाई का उपयोग करने से बचें।