विक्रमशिला सेतु पर मरम्मत के 14वें दिन गुरुवार को पाया संख्या चार पर बॉल-बियरिंग बदलने का कार्य हुआ। पाया संख्या दो और तीन के नीचे कार्बन प्लेट चिपकाने और दरारों में ग्राउंटिंग भरने का भी कार्य हुआ। बारिश के कारण सेतु पर पांच घंटा कार्य बाधित रहा। जहां पाया संख्या चार पर दोपहर 1 बजे तक बॉल-बियरिंग बदला जाना था, उसे बदलने में शाम हो गई।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!नवगछिया जाने के क्रम में डीएम प्रणव कुमार ने विक्रमशिला सेतु का निरीक्षण भी किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने एक्जुकेटिव इंजीनियर विजय कुमार से सेतु के मरम्मत कार्य की जानकारी ली। उम्मीद जताई जा रही है कि 15 अक्टूबर की रात से सेतु पर परिचालन शुरू हो सकता है। एक्सपेंशन ज्वाइंट के ढलाई पर जहां हर एक घंटे पर पानी का छीड़काव किया जा रहा था, वहीं बारिश होने से एक्सपेंशन ज्वाइंट के ढलाई को जमने में बहुत लाभ मिलेगा है। हालांकि दोनों एक्सपेंशन ज्वाइंट पर कंक्रीट ढलाई के बाद उसका खास ख्याल रखा जा रहा है। उसपर बोरा रख दिया गया है। बारिश होने से उम्मीद जताई जा रही है कि एक्सपेंशन ज्वाइंट पर कंक्रीट ढलाई सात दिनों तक में ठोस हो जाएगा।

विक्रमशिला पुल पर ज्वाइंट का काम हुआ पूरा।
सेतु के कुल छह बॉल-बेयरिंग बदले गए

पुल के पाया संख्या दो और तीन के नीचे कार्बन प्लेट चिपकाने और दरारों में ग्राउंटिंग भरने का कार्य अब अंतिम चरण में है। शुक्रवार को भी पुल के पाया संख्या दो और तीन के नीचे कार्बन प्लेट चिपकाने और दरारों में ग्राउंटिंग भरने का कार्य होगा। पहले पाया संख्या दो और पाया संख्या तीन के दो-दो बॉल-बियरिंग निकाल कर बदले जा चुके हैं। सेतु में कुल छह बॉल-बियरिंग है। चार बदली हो चुके थी। गुरुवार को पाया संख्या चार के भी दो पुराने बॉल-बियरिंग निकाल कर उसमें नए बॉल-बेयरिंग लगा दिए गए है।
