पटना. लोकसभा चुनाव 2019 में बिहार की सबसे चर्चित सीट बेगूसराय रही। यहां बीजेपी के फायर ब्रांड नेता गिरिराज सिंह का सामना जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष व सीपीआई प्रत्याशी कन्हैया कुमार से था। राजद उम्मीदवार तनवीर हसन ने लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने की पूरी कोशिश की। हालांकि, राष्ट्रवाद की लहर के आगे कन्हैया टिक नहीं पाए। गिरिराज को बड़ी जीत मिली। गिरिराज को 3.94 लाख से अधिक वोट मिले, जबकि कन्हैया 2.51 लाख वोट ही पा सके।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!प्रखर दिखा राष्ट्रवाद का रंग
बेगूसराय में राष्ट्रवाद का रंग प्रखर रूप से दिखा। जेएनयू में भारत विरोधी नारे लगाने के आरोप से चर्चा में आए कन्हैया राष्ट्रवाद के आगे टिक नहीं पाए। अपनी सभाओं में कन्हैया जनता के सामने राजद्रोह के आरोप पर सफाई देते रहे, लेकिन लोगों का भरोसा जीतने में कामयाब न हो सके। कन्हैया और तनवीर दोनों बीजेपी विरोधी वोट के लिए संघर्ष करते रहे। विरोधी वोट के बिखराव का फायदा गिरिराज को हुआ। गिरिराज सिंह राष्ट्रवाद, विकास के साथ-साथ कन्हैया के खिलाफ देशद्रोह वाली छवि को भुनाने से नहीं चूके।

देशद्रोह वाली छवि से नहीं मिली मुक्ति
कन्हैया ने देश भर के मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा, लेकिन देशद्रोही वाली छवि से मुक्त न हो पाए। वह अपने सभाओं में कहते रहे कि बेगूसराय का बेटा हूं। इस धरती पर जन्म लेने वाला कोई देशद्रोही नहीं हो सकता। मुझे देशद्रोही बताकर बीजेपी के लोग पूरे बेगूसराय का अपमान किया है। बेगूसराय के लोगों को इस अपमान का बदला लेना होगा। लोगों ने कन्यैया के भाषण सुना, तालियां और सीटी बजाई, लेकिन भरोसा न किया।

काम नहीं आए स्टार प्रचारक
कन्हैया के पक्ष में चुनाव प्रचार के लिए देशभर लोग बेगूसराय आए। यहां मोदी विरोधी लोगों का जुटान दिखा। प्रकाश राज, जावेद अख्तर, शबाना आजमी और स्वरा भास्कर जैसे दर्जनों जानी-मानी हस्तियां कन्हैया के लिए चुनाव प्रचार करने आईं, लेकिन वे जीत न दिला सके। कन्हैया के चुनाव प्रचार के लिए जेएनयू के दर्जनों छात्र बिहट में डेरा जमाए रहे। सैकड़ों की संख्या में पूरे देश से लोग वोट मांगने आए। रोड शो हो या जनसंपर्क कन्हैया का चुनावी अभियान काफी व्यवस्थित दिखा। कन्हैया को बाहरी लोगों का खूब साथ मिला, लेकिन स्थानीय लोग जुड़ न सके। वह लोगों का ध्यान तो आकर्षित कर पाए, लेकिन उसे वोट में बदल न सके
