खुद को भावी न्यायिक अधिकारी और वकील के रूप में देख रहे लॉ के छात्रों ने टीएमबीयू में चल रही परीक्षाओं में नियमों की धज्जियां उड़ा दीं। विवि के बहुद्देशीय प्रशाल में चल रही तीन और पांच वर्षीय लॉ की परीक्षा में गुरुवार को नकल करने के लिए अपने साथियों के पास बैठने के लिए छात्रों ने सीट प्लान फाड़ दिया। ग्राउंड फ्लोर से ऊपरी मंजिलों तक दौड़-भाग करते रहे और अपने साथियों के साथ बैठने के लिए जगह ढूंढते रहे। दूसरी पाली में तीन वर्षीय लॉ डिग्री कोर्स के पांचवें सेमेस्टर के तीसरे पेपर की परीक्षा के लिए हॉल में प्रवेश करते ही छात्रों ने दौड़ भाग करनी शुरू कर दी। मीडिया ने तस्वीर लेनी चाही तो छात्र उनसे उलझने लगे।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!कुछ छात्र कमरे के कोने में बैठने पर अड़े
कुछ छात्र ऐसे भी थे जो परीक्षा केन्द्र के एक कोने में बैठने पर अड़े थे। यह सब केन्द्राधीक्षक और वीक्षकों के सामने होता रहा। परीक्षा केन्द्र पर तैनात गिनतीभर के पुलिसकर्मी भी मूकदर्शक बने रहे। करीब आधे घंटे तक छात्रों ने ऐसा माहाैल कर दिया था जैसे परीक्षा देने नहीं बल्कि भोज खाने के लिए सीट कब्जा कर रहे हों। बाद में और पुलिस बल मंगाया तब छात्र शांत हुए।

छात्र बोले, पर्ची से नहीं चला पता कहां बैठना है
इधर छात्रों का कहना था कि बेंच-डेस्क पर साटे गए रोल नंबर की पर्ची से कुछ पता ही नहीं चल रहा था कि किसे कहां बैठना है। इसी से नाराज होकर कुछ छात्रों ने इसे फाड़ दिया और गुस्से में दूसरी जगह जाकर बैठ गए। इस बारे में परीक्षा नियंत्रक डॉ. अरुण कुमार सिंह ने बताया कि परीक्षा आधे घंटे बाधित हुई।

ऑब्जर्वर, केन्द्राधीक्षक व वीक्षक की व्यवस्था फेल
लॉ की परीक्षा में लगातार नकल होने पर विवि ने दो ऑब्जर्वर नियुक्त किया था। लेकिन इसका असर दिख नहीं रहा है। केन्द्राधीक्षक और वीक्षक भी छात्रों के आगे झुक जाते हैं। केवल कॉपी और प्रश्नपत्र बांटकर परीक्षा तो कोई भी ले सकता है। फिर ऑब्जर्वर और केन्द्राधीक्षक की जरूरत ही क्या है। इस बार लॉ की परीक्षा में जिस तरह के मामले सामने आए हैं उससे लॉ छात्रों के अनुशासन पर भी सवाल उठता है।

