भागलपुर: गर्ल्स हॉस्टल में जारी हुआ बुर्का पहनने का फरमान.. बर्दाश्त नहीं, गेट पर किया पथराव

भागलपुर / पटना

भागलपुर जिले के सरकारी अल्पसंख्यक गर्ल्स हॉस्टल में जमकर हंगामा देखने को मिला। यहाँ रहने वाली मुस्लिम समुदाय की छात्राओं ने शनिवार दोपहर को हॉस्टल सुपरिटेंडेंट नाहिदा नसरीन के कैंपस के अंदर बुर्का पहनने के फरमान को लेकर नाराजगी जताई।

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ये लड़कियाँ इतनी गुस्से में थीं कि उन्होंने हॉस्टल के गेट पर पथराव किया और आरोप लगाया कि सुपरिटेंडेंट नाहिदा नसरीन उन पर तालिबानी शरिया कानून थोप रही हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से कैंपस में उनकी व्यक्तिगत आजादी पर सवाल उठाया जा रहा है उससे वे तंग आ चुकी हैं और उन्हें बुर्का पहनने के लिए कट्टर सुपरिटेंडेंट द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है।

पहले भी उन्होंने नीतीश कुमार सरकार के बिहार कल्याण विभाग को ई-मेल कर इस समस्या के बारे में बताया था। वे सड़क पर उतर अपनी नाराजगी जताना चाहती थीं, लेकिन नाहिदा नसरीन ने हॉस्टल का गेट नहीं खोला। बता दें कि यह हॉस्टल भागलपुर के बीचों बीच बीएन कॉलेज के पास स्थित है।

ऐसा लगता है कि लड़कियों और नाहिदा नसरीन के बीच यह तकरार लंबे समय से चल रहा था क्योंकि दरक्शा अनवर नाम की एक छात्रा ने बताया कि जब भी लड़कियाँ पैंट पहनती हैं तो सुपरिटेंडेंट छात्राओं को गाली देती हैं। इसके साथ ही छात्रा ने आरोप लगाया कि वह उनके माता-पिता को भी गलत जानकारी देती हैं कि वह लड़कों से बात करती हैं।

लड़कियों ने बताया कि बिहार के गर्म और उमस भरे मौसम में बुर्का पहनना काफी मुश्किल होता है, इसलिए वे कैंपस में ट्राउजर और टी-शर्ट पहनती हैं। एक रिसर्च स्कॉलर नेदा फातिमा ने बताया कि जब भी नाहिदा नसरीन किसी भी छात्रा को पैंट में देखती है या स्कूटी रखने वाली अपनी छात्राओं से बात करते हुए देखती है तो डाँटती-फटकारती है।

घटना की सूचना मिलने पर नाथ नगर की सर्किल ऑफिसर स्मिता झा पुलिस टीम के साथ गर्ल्स हॉस्टल पहुँचीं और गेट खुलवाया। हाथ में तख्तियाँ लिए लड़कियाँ तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में पहुँचीं। उन्होंने विश्वविद्यालय की कुलपति नीलिमा गुप्ता से मिलने का आग्रह किया, क्योंकि वे चाहते थे कि नाहिदा नसरीन को सुपरिटेंडेंट के पद से तत्काल हटाया जाए। हालाँकि बाद में डीएसडब्ल्यू रामप्रवेश सिंह और प्रॉक्टर रतन मंडल द्वारा इस मामले में जाँच का आश्वासन दिए जाने के बाद वे मान गए। लड़कियों को डर था कि उनके खिलाफ आवाज उठाने पर नाहिदा नसरीन उन्हें हॉस्टल से निकाल देंगी।