भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए अपनी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत राज्य सरकार ने एक और बड़ा फैसला शुक्रवार को लिया है। राज्य कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय हुआ है कि घूस लेते रंगे हाथ पदाधिकारियों और कर्माचारियों को पकड़वाने वाले को राज्य सरकार इनाम देगी। यह इनाम एक हजार से लेकर दस हजार तक होगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में 15 प्रस्तावों पर मंजूरी मिली।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इनाम दिये जाने को लेकर निगरानी विभाग शीघ्र ही अधिसूचना जारी करेगी। इसके बाद राज्य में यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। किसी सरकारी सेवकों द्वारा घूस की मांग करने वाले की सूचना देने वाले को निगरानी के द्वारा संबंधित पदाधिकारी-कर्मचारी के पास राशि देकर भेजा जाएगा। इसके बाद घूस की सूचना सही पाये जाने पर इनाम दिया जाएगा। इसको लेकर राज्य सरकार एक अलग कोष का गठन करेगी। सूचना देने वाले को पदाधिकारियों के पास तक आने-जाने के लिए यात्रा खर्च भी दिया जाएगा।

भूमिहीन स्कूलों का होगा अपना भवन : राज्य के 947 प्राईमरी स्कूल अपने भवन में जाएंगे। ये सभी ऐसे स्कूल हैं, जिनके पास पहले कोई भूमि नहीं थी। इस कारण ये किसी दूसरे स्कूल के भवन में संचालित हो रहे हैं। अब इन स्कूलों के लिए जमीन मिल गई है। इनके भवन निर्माण का काम अब शुरू होगा।
मंत्री के आप्त सचिवों को तीन लाख तक की यात्रा: राज्य सरकार के मंत्रियों के आप्त सचिवों और सहायकों को मंत्री के साथ कहीं भी आने और जाने के क्रम में अब अधिकतम तीन लाख तक सालाना यात्रा भत्ता दिया जाएगा। पूर्व के नियमों के अनुसार इस मद में अधिकतम डेढ़ लाख तक की राशि दिए जाने का प्रावधान था।
दो अभियंता बर्खास्त
ग्रामीण कार्य विभाग के दो अभियंता मिथिलेश कुमार और ओमप्रकाश मांझी को बर्खास्त किया गया है। इनके खिलाफ विभिन्न तरह के आरोप थे। जांच के बाद राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया।
पटना मेट्रो में नियुक्ति के लिए विभिन्न श्रेणी के 191 पदों पर नियुक्ति होगी। राज्य कैबिनेट ने इन पदों के सृजन की मंजूरी दे दी। शीघ्र ही इन पदों पर नियुक्ति की कार्रवाई शुरू होगी। पटना मेट्रो के लिए कुल 191 पदों की स्वीकृति तो हो गई लेकिन नियुक्ति अभी सिर्फ 30 पदों पर ही की जाएगी। इनमें निदेशक सह मुख्य महाप्रबंधक तकनीकी, निदेशक सह मुख्य वित्त अधिकारी, महाप्रबंधक (क्रय) सहित अन्य पद शामिल हैं। फिलहाल इन 30 में से सिर्फ चार पदों पर अतिरिक्त प्रभार में पदाधिकारी तैनात हैं। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।
