बिहार में नये सत्र से चार वर्षीय बीएड कोर्स की होगी शुरुआत, इंटर के बाद ही…

शिक्षा/जानकारी

राज्य में नये सत्र से चार वर्षीय बीएड कोर्स की पढ़ाई शुरू होगी। राजभवन ने चार वर्षीय बीएड कोर्स को लागू करने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। राजभवन द्वारा बनायी गई नयी नियमावली में बीएससी बीएड व बीए बीएड कोर्स की पढ़ाई होगी। दोनों को अलग-अलग बांट दिया गया है। अब बीएड कोर्स करने के लिए स्नातक पास करने की जरूरत नहीं होगी। इंटर पास परीक्षार्थी चार वर्षीय बीएड कोर्स करने के लिए योग्य होंगे।

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वैसे छात्र-छात्राएं जो बीए और बीएसएसी नहीं करना चाहते हैं, वे सीधे चार वर्षीय बीएड कोर्स में दाखिला ले सकेंगे। नये कोर्स का ऑर्डिनेंस और रेगुलेशनल बनकर तैयार हो गया है।

इस कोर्स के परिनियम को बनाने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में नालंदा विवि के कुलपति प्रो. आरके सिन्हा, मुंगेर विवि के कुलपति प्रो. आरके वर्मा और बीएन मंडल के विवि के प्रो. एके राय को रखा गया है। इस चार वर्षीय बीएड कोर्स को लागू करने के लिए राज्य के सभी कुलपति से सलाह मांगी गई है। इसका पत्र राजभवन ने सभी विश्वविद्यालयों को भेज दिया है।

संयुक्त प्रवेश परीक्षा के आधार पर होगा दाखिला

राजभवन की ओर से बनाये गये नये ऑर्डिनेंस के हिसाब से बीएड कोर्स में दाखिले के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। इसके आयोजन के लिए एक नोडल प्रभारी नियुक्त किये जायेंगे। इंटर पास परीक्षार्थियों को जो सामान्य श्रेणी से आते हैं इन्हें 50 प्रतिशत अंक व अन्य श्रेणी के छात्रों को 45 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य है। वहीं प्रवेश परीक्षा में शामिल सामान्य श्रेणी के छात्रों को 45 अंक और अन्य श्रेणी के छात्रों को 40 अंक लाना अनिवार्य होगा। इससे कम अंक प्राप्त करने वाले छात्रों का दाखिला नहीं होगा।

इंटर के बाद ही मिल जाएंगे ट्रेंड शिक्षक

राज्य में चार वर्षीय बीएड कोर्स शुरू होने से काफी फायदा होगा। छात्रों का समय बर्बाद नहीं होगा। पहले स्नातक के बाद दो साल का बीएड कोर्स करना पड़ता था। इसमें पांच साल का समय लगता था। अब इंटर के बाद ही बीएड कोर्स में दाखिला लेने के बाद चार साल में ही कोर्स पूरा हो जाएगा। एक साल की बचत होगी। अब इंटर के बाद बीएड कोर्स में दाखिला होने से पहले से ही प्रशिक्षित शिक्षक तैयार हो जाएंगे। सरकार को प्रशिक्षित मिलने से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। इसके लिए अलग से कुछ ट्रेनिंग नहीं करानी होगी। जैसे पूर्व में अप्रशिक्षित को ट्रेनिंग कराना पड़ता था।