नवगछिया : अनुमंडल मुख्यालय से 10 किमी दूर मदरौनी गांव। बिल्कुल कोसी के कछार पर बसा है यह गांव। यहां करीब 2500 मकान हैं। आबादी तकरीबन 10 हजार के करीब। नेपाल से वीरपुर बराज में एक साथ 56 गेट खोलने से कोसी का पानी 24 घंटे में ही सहोरा-मदरौनी पहुंच गया है। सोमवार सुबह से शाम 5 बजे तक यानी 12 घंटे में एक हाथ (डेढ़ फीट) जलस्तर बढ़ गया है। जिससे मदरौनी और सहोरा के ग्रामीण दहशत में हैं। खौफ यह कि 10 दिन पहले आया पानी रेलवे तटबंध को आधा काट चुका है। जिसे रविवार को जियो बैग और ईंट-रोड़े डालकर बंद किया गया है। यदि पानी ओवरफ्लो हो जाएगा तो पूरा गांव तबाह हो जाएगा। तटबंध के किनारे पानी में ‘भंवरा बनने से भी ग्रामीण सशंकित हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!पहली बार तटबंध के किनारे बन रहा ‘भंवरा, दहशत
ग्रामीण ‘भंवरा बनने को काल बताते हैं। तटबंध पर खड़े सहोरा निवासी कौशल यादव बताते हैं, किनारे पर भंवरा बनने का मतलब ही है कटाव होना। आज तक कभी किनारे भंवरा बनते नहीं देखा है। अगले 24 घंटे में क्या होगा? भोले बाबा जाने। उनका इशारा मदरौनी गांव के कॉर्नर पर भोला मंदिर की ओर था। इसी कॉर्नर पर सुबोध ठाकुर आठ-दस लोगों के साथ पानी के करंट पर चर्चा करते मिले। सुबोध बताते हैं, कोसी का पानी यदि मंदिर आ गया तो समझिए काल तय है। 10 दिन पहले हल्की बढ़ोतरी में मंदिर परिसर में करीब आधा फीट पानी घुस गया था।
50 साल पहले घनी सहोरा बस्ती को लील गई थी कोसी
मंदिर में गांव की दर्जन भर महिलाएं भोले बाबा को रिझाने के लिए भजन गा रही हैं। इससे इतर आधा दर्जन महिलाएं कोसी किनारे लाल पानी को निहार रही हैं। 95 वर्षीय तारा देवी कोसी के पानी को दिखाकर बताती हैं कि 40-50 साल पहले ऐसा ही लाल पानी सहोरा में दिखा था। पूरा सहोरा डूब गया। करीब सतरह-अट्ठारह सौ परिवार को रातोंरात भागना पड़ा था। अब लगता है मदरौनी के ऊपर से भी कोसी बहेगी। यहीं सुलोचना देवी मिलीं। बोलीं, दो दिन से हमलोग रातभर जाग रहे हैं। दिन में पानी बढ़ा तो कम से कम भागने की स्थिति में होंगे। रात में सुप्तावस्था में कोसी किनारा काटने लगेगी तो कोई रास्ता भी नहीं बचेगा।

जियो बैग डालकर रिटायर्ड रेलवे तटबंध को बचाने में जुटा तंत्र
कोसी के कहर से बड़ी आबादी को बचाने में पूरा तंत्र जुटा हुआ है। रेलवे फाटक से मदरौनी शिव मंदिर तक तटबंध ही गांव को पानी से बचाता आया है। इस माह दो बार कोसी में बढ़ोतरी से पश्चिमी हिस्से के टोलों में बाढ़ आ गई है। मदरौनी नासी टोला में दोराहे पर कोसी का दबाव बना हुआ है। पूरब दिशा से आई बाढ़ ने करीब 100 मीटर तक सड़क आधी काट दी। जिसे आनन-फानन में सोमवार सुबह जियो बैग और ईंट-रोड़ा डालकर कटाव रोकने की कोशिश की गई। इसके ठीक सामने प्राथमिक विद्यालय नासी टोला के पास पूरा गांव जलमग्न हो गया है। इस तटबंध को बचाने के लिए आठ-दस जगह पर जियो बैग डाला गया है। करीब एक हजार जियो बैग मंदिर के पास स्टॉक किया गया है। ताकि आपात स्थिति में इसका उपयोग किया जा सके।
तटबंध के कटाव स्थल पर जियो बैग डालकर सुरक्षित किया गया है। सहोरा-मदरौनी में कोसी के जलस्तर की हर घंटे रिपोर्ट ली जा रही है। फिलहाल हालात नियंत्रण में है। आपात स्थिति से निबटने के लिए प्रशासन तैयार है।
– डॉ. नवल किशोर चौधरी, डीएम।
