नवगछिया–भागलपुर के बीच संकट: पुल टूटने के बाद नाव ही सहारा, बढ़ी मुश्किलें
भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के एक हिस्से के गिरने के बाद नवगछिया और भागलपुर के बीच जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। रोजाना करीब 1 लाख लोगों की आवाजाही पर असर पड़ा है और अब लोगों को नाव के सहारे गंगा पार करनी पड़ रही है।
छात्राओं का दर्द
नवगछिया की छात्रा पूजा कुमारी ने बताया कि रोज पढ़ाई के लिए भागलपुर आना-जाना करती हैं। पुल टूटने की जानकारी मिलने के बाद घाट पहुंचीं, काफी इंतजार के बाद नाव मिली। 100 रुपये किराया देकर करीब 40 मिनट में गंगा पार कर भागलपुर पहुंचीं।
एक अन्य छात्रा, जो मारवाड़ी कॉलेज भागलपुर में एमकॉम की छात्रा हैं, ने बताया कि 2 घंटे इंतजार के बाद नाव मिली। उन्होंने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई—नाव पर किसी के पास लाइफ जैकेट नहीं था, जिससे डर का माहौल बना हुआ है, लेकिन पढ़ाई के कारण मजबूरी में सफर करना पड़ रहा है।

कारोबार पर असर
केला कारोबारी मनोहर यादव ने कहा कि अब जहाज/नाव वाले 300 रुपये तक किराया मांग रहे हैं, जिससे लागत बढ़ गई है और फल महंगे बेचने की नौबत आ गई है। कारोबारी राजा मंडल ने भी कहा कि जब तक पुल नहीं बनता, व्यापार प्रभावित रहेगा और परिवार चलाना मुश्किल हो जाएगा।
आम लोगों की परेशानी
- नाव मिलने में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है
- किराया कई गुना बढ़ गया है
- सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं
एक नवविवाहित जोड़े को भी नाव से ही ससुराल जाना पड़ा। दुल्हन ने बताया कि शादी के बाद रस्में पूरी कर लौटना था, लेकिन पुल टूटने के कारण नाव का सहारा लेना पड़ा।
ओवरलोडिंग से बढ़ा खतरा
स्थिति इतनी गंभीर है कि 25 लोगों की क्षमता वाली नाव पर 75 लोग और करीब 30 बाइक तक लादी जा रही हैं।
- एक व्यक्ति से 200–300 रुपये तक वसूले जा रहे हैं
- बाइक के लिए भी 300 रुपये तक किराया लिया जा रहा है
- लाइफ जैकेट जैसी सुरक्षा व्यवस्था नदारद है
20 साल पुरानी स्थिति लौटी
बाइक सवार पवन कुमार ने कहा कि 20 साल पहले जैसी स्थिति फिर से बन गई है। घंटों इंतजार के बाद भी नाव नहीं मिल रही। लोगों ने प्रशासन से वैकल्पिक व्यवस्था बढ़ाने की मांग की है।
मजबूरी में सफर
एक व्यक्ति ने बताया कि पहले 10 रुपये में गंगा पार हो जाती थी, अब 100 रुपये देने पड़ रहे हैं। बावजूद इसके, शादी-ब्याह और जरूरी काम के कारण लोगों को जोखिम उठाकर सफर करना पड़ रहा है।

