नवगछिया : फर्जी क्लीनिक ने ली गर्भस्थ शिशु की जान, चीरा-टांका लगा प्रसूता को कर दिया रेफर

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नवगछिया : नारायणपुर में धड़ल्ले से फर्जी क्लीनिक संचालित हैं। आलम ये है कि गर्भवतियों की जान जा रही है। रविवार को उज्जवल क्लिनिक मधुरापुर में ऑपरेशन के समय गर्भ में बच्चा मर गया। इस बाबत ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया। मामले की जांच की बात तो कही जा रही है लेकिन इस तरह के फर्जी नर्सिंग होम और क्लीनिक पर लगाम कब लगेगी, ये बड़ा सवाल बन गया है।

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नारायणपुर में एक भी पंजीकृत क्लीनिक नहीं है। सीएस नारायणपुर: उज्जवल क्लीनिक मधुरापुर में रविवार को जमकर हंगामा हुआ। हंगामा का कारण बताया जाता है कि उज्जवल क्लीनिक में शनिवार की रात्रि चकरामी गांव की गर्भवती महिला लहेरी खातुन का ऑपरेशन (सिजेरियन) किया गया था। ऑपरेशन के समय गर्भ में पल रहा बच्चा मरने का मामला प्रकाश में आया है। वक्त की नजाकत को समझते हुए उज्जवल क्लीनिक से महिला को गंभीर अवस्था में भागलपुर ले जाने के लिए कहा गया। परिवार वालों ने उसे भागलपुर क़े एक निजी क्लीनिक में भर्ती करवाया, जहां महिला स्वस्थ है। लेकिन बच्चा मर गया। प्रखंड अंतर्गत चकरामी गांव के जहूर मियां की पत्नी लहेरी खातून गर्भवती थी।

ऑपरेशन के ले लिए गए पांच हजार रुपये

परिवार वालों के कथनानुसार गर्भावस्था में उसे उज्जवल क्लीनिक में भर्ती करवाया गया। डॉक्टर ने बताया कि सिजेरियन करके बच्चा निकालना होगा। परिवार वालों ने सहमति दिया। इसके बाद उज्जवल क्लीनिक में लहेरी खातुन का सिजेरियन किया गया तो परिवार वालों के अनुसार बच्चा मर गया। बच्चा मरने के बाद महिला की स्थिति बिगड़ने लगी। स्थिति बिगड़ने के लिए डॉक्टर ने खुद को बचाते हुए परिवार वालों से कहा कि इसे भागलपुर ले जाइए मैं अब कुछ नहीं कर सकता हूं। इस पर परिवार वालों ने लहेरी खातुन को भागलपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया जहां महिला सुरक्षित है। परिवार वाले कहते हैं कि पेट के पास चीरा लगा है। अर्थात यहां ऑपरेशन हुआ। ऑपरेशन करने से पहले पांच हजार भी लिया गया था।

वसूला जा रहा मनमाना रुपया

लहेरी के रिश्तेदार सैयद बताते हैं कि यदि उज्जवल में सेजेरियन करके बच्चा नहीं बचाया जा सकता था रिस्क नहीं लेना चाहिए था। रविवार को क्लीनिक के बाहर लोगों ने जमकर हंगामा किया। लोगों का कहना था कि क्लीनिक में सर्जन नहीं बैठता है। जब सर्जन ही नहीं बैठता है तो सीजेरियन किसने किया। किसके नाम पर क्लीनिक चल रहा है। किसने लाइसेंस दिया है। ग्रामीणों का आरोप था कि नारायणपुर में इसी प्रकार से पांच अवैध क्लीनिक संचालित हो रहा है जहां सिजेरियन, बच्चादानी ऑपरेशन के नाम पर मनमाना रूपये क्लीनिक वाले लेते हैं।ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारी से मांग किया है कि मामले का उच्च स्तरीय जांच होना चाहिए।

एक भी पंजीकृत क्लीनिक नहीं- सीएस

हंगामे की सूचना पर भवानीपुर ओपी अध्यक्ष रमेश कुमार साह,पुलिस पदाधिकारी मुकेश सिंह, बसंत कुमार दल बल के साथ पहुंचे और हंगामा को शांत करवाया। मामले के बारे में क्लीनिक संचालक से पक्ष लेने का प्रयास किया गया लेकिन उसके मोबाइल नंबर पर संपर्क नहीं हो सका। क्या कहते हैं सीएस-भागलपुर सीएस डॉ उमेश शर्मा ने कहा कि जांच का मामला है। ऑपरेशन करने वाला एक भी पंजीकृत क्लीनिक नारायणपुर में नहीं है।

नारायणपुर में खूब चल रहा है फर्जी क्लीनिक का कारोबार
    सिजेरियन, बच्चादानी से अपेंडिक्स तक का होता है ऑपरेशन             

फर्जी क्लीनिक में ऑपरेशन का खेल

नारायणपुर प्रखंड में फर्जी क्लीनिक, नर्सिंगहोम का कारोबार खूब चलने का मामला प्रकाश में आया है। क्लीनिक खुलते ही इसमें काम करने वाले डॉक्टर और स्टाफ दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करने लगते हैं। यह भी मामला प्रकाश में है कि क्लीनिक में सिजेरियन, बच्चादानी, हर्निया, अपेंडिस का ऑपरेशन होता है। नारायणपुर में चल रहे अवैध क्लीनिक, अल्ट्रासाउंड में काम करने वाला कर्मी प्रशिक्षित नहीं रहता है। यूं ही काम करते करते अनुभव हो जाता है और वह डॉक्टर को सहयोग करने लगते हैं।

झोलाछाप के भरोसे इलाज

डॉक्टर भी कुशल सर्जन नहीं होते हैं। इसके साथ ही ऑपरेशन करने से पहले एनेस्थेटिक अर्थात बेहोश करने की सुविधा भी नहीं है। चर्चा यह भी है कि यहां कुल मिलाकर पाँच से छह क्लीनिक है जहां सिजेरियन का सत्रह से बीस हजार और बच्चादानी का दस से बारह हजार रुपये, हर्निया का दस हजार, अपेंडिक्स का ऑपरेशन छह से पांच हजार रुपये में लिया जाता है।इसका कोई लेखा-जोखा नहीं है। यदि ऑपरेशन के बाद स्थिति गंभीर होती है तो रेफर किया जाता है जिसकी जिम्मेदारी यहां के डॉक्टर की नहीं होती है। कोई अनहोनी घटना हो जाती है तो रुपया के बल पर उस मामला को मैनेज कर लिया जाता है।

कमीशन का खेल

यहां अल्ट्रासाउंड का भी दो से तीन जगह काम होता है। क्लीनिक भी पांच हैं। एक तरफ सरकार ने सुरक्षित प्रसव के लिए सरकारी अस्पताल में सभी प्रकार की सुविधा दिया है लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि सरकारी हॉस्पिटल में प्रतिदिन पांच से सात प्रसव  होता है इसलिए सरकारी अस्पताल के अलावा निजी क्लीनिक या नर्सिंग होम में प्रसव कराने के लिए महिला कहां और कैसे आ जाती है इसके पीछे बड़ा गोलमाल है। अर्थात कुछ अर्द्ध सरकारी कर्मी इसमें कमीशन के तौर पर गर्भवती महिला को बरगला कर निजी क्लीनिक में लाते हैं, जहां डॉक्टर सीधा-सीधा सीजेरियन कर देते हैं जिसमें जिसमें प्रसूति महिला को क्लिनिक लाने वाले और इसमें सहयोग करने वाले का कमीशन रहता है।

चिकित्सकों का मानना है कि ऑपरेशन से पूर्व बेहोश किया जाता है। सवाल ये उठता है कि एनेस्थेटिक कैसे किया जाता है। इस समय बड़ा ही जोखिम भरा काम डॉक्टर को करना पड़ता है। क्लीनिक में इस तरह का काम कौन करता है यह भी गंभीर जांच का विषय है।