नवगछिया – नौका हादसे के दूसरे दिन भी दर्शनिया घाट पर शुक्रवार को दिन भर लोगों की आवाजाही जारी रही. दर्शनियां घाट पर अमूमन इतनी भीड़ तब दिखती है जब माघी पूर्णिमा का मेला होता है या फिर गंगा घाट पर कोई धार्मिक आयोजन. एक तरफ लोगों की नजरें गंगा की उठती गिरती लहरों पर टिकी थी तो दूसरी तरफ गंगा की लहरें हर पल एक दर्दनाक कहानी उगल रही थी. कभी पॉलिथीन में बंद सत्तू की पोटली लहरों के बीच बहे जा रहा था तो कभी तो कभी लोगों ने रोटियों को लहरों के बीच बहते देखा.
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!गंगा की लहरें एक के बाद एक कहानी कह रही थी और लोग आह भरते हुए भगवान को कोस रहे थे कि आखिर इन गरीबों का क्या कसूर था. तभी एक ही तरह के दो हवाई चप्पल नदी के लहरों पर लोगों ने बहते हुए देखा. लोग जब तक कुछ अंदाजा लगाते तबतक गंगा तट पर सूनी आंखों से गंगा की लहरों को निहार रहे लत्तरा निवासी कारे लाल यादव अनायास बोल उठते हैं देखो यह मेरी बेटी का चप्पल है. तभी गंगा की लहरें कारेलाल के आंखों में उतर आती हैं और यह लहरें अश्रु धारा के रूप में बहने लगती हैं.

कारे लाल गंगा के इन लहरों में अपनी बेटी सीता देवी और नाती रणवीर कुमार को खो चुके हैं. कारे लाल कहते हैं रोजाना सीता तो अपने पति के पास 12 सीट बाजार खाना लेकर या मक्का बोने जाती थी लेकिन गुरुवार को बहुत दिनों के बाद पहली बार उसका 12 वर्षीय नाती रणवीर भी अपनी मां के साथ गया था. कारे लाल कहते हैं उन्होंने अपनी पुत्री का विवाह करीब 15 वर्ष पहले शंकर यादव के लड़के पप्पू यादव से किया था. सीता मेहनती थी और वह अपने पति के काम में हाथ बटाती दी थी जिसके कारण परिवार का गुजारा किसी न किसी तरह हो ही रहा था.
कारेलाल यह याद करके रो पड़ते हैं कि उसका नाती जब भी उनसे मिलने आता तो यह कहता था कि जिस तरह आपने मुझे बचपन में लाड़ प्यार दिया उसी तरह एक दिन आपके सारे खर्चे मैं उठाऊंगा और आपको काम नहीं करने दूंगा. यह कहते ही वृद्ध कारे लाल फफक कर रोने लगते हैं. कारे लाल कहते हैं बस एक बार वह अपनी बेटी और नाती को देखना चाहते हैं. इस आस में वे देर शाम तक गंगा तट पर बैठकर लहरों को निहारते रहे लेकिन आज भी उन्हें मायूसी हाथ लगी.
