नवगछिया अनुमंडल की आवो हवा में शहद की मिठास घुल रही है। इस क्षेत्र के सर्वाधिक किसानों ने शहद उत्पादन के प्रति रुचि दिखायी है। विभाग की भी योजना है कि इस क्षेत्र को शहद उत्पादन में अव्वल बनाना है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इसके लिए सर्वाधिक शहद उत्पादन किट बॉक्स इसी क्षेत्र के किसानों को दिया गया है। पिछले साल जिले में 1500 किट बॉक्स अनुदानित दर पर दिए गए थे, इस बार 2700 बॉक्स दिए गए हैं। नवगछिया का आपराधिक रिकॉर्ड बताता है कि अक्सर बेरोजगार लोग अपराध की राह पर चले जाते हैं। ऐसे में मधुमक्खी पालन लोगों के लिए बड़ा विकल्प बन रहा है कि थोड़ी सी मेहनत से अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिहाज से उद्यानिक फसलों के प्रति किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। इसके लिए 75 प्रतिशत अनुदान भी दिया जा रहा है। इस साल जिले में दोगनुा शहद उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसलिए 1500 की जगह 2700 किट बॉक्स वितरित किए गए। जिला उद्यान पदाधिकारी अजय कुमार सिंह बताते हैं कि एक बॉक्स की कीमत चार हजार रुपए है जिसमें तीन हजार सरकार अनुदान दे रही है।

कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मधुमक्खी पालन के प्रति किसानों का रुझान अब बढ़ने लगा है। खासकर नवगछिया क्षेत्र के किसान ज्यादा प्रेरित हैं। 2700 किट बॉक्स में करीब 2000 बॉक्स नवगछिया अनुमंडल के प्रखंडों में लगे हैं। संभावना है कि अगले एक-दो साल में नवगछिया क्षेत्र के अधिकांश किसान इस कुटीर उद्योग से जुड़ जाएंगे। लक्ष्य है कि नवगछिया को शहद का हब बनाया जाय।
एक बॉक्स से 40 किलो तक शहद मिल सकता है
नवंबर से अप्रैल तक का महीना मधुमक्खी पालन के लिए सबसे उपयुक्त रहता है। एक डिब्बे से 30 से 40 किलो तक शहद मिल जाता है। शहद से तो कमाई होती ही है, मधुमक्खियों की भी बिक्री कर दोहरी कमाई की जा सकती है।
वसंत ऋतु सबसे उपयुक्त
वसंत ऋतु मधुमक्खियों के पालन के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इस समय सभी स्थानों में प्रयाप्त मात्रा में पराग और मकरंद उपलब्ध रहते हैं। परिणाम स्वरूप शहद का उत्पादन भी बढ़ जाता है। इस समय देखरेख की आवश्यकता उतनी ही पड़ती है जितनी अन्य मौसमों में होती है।
पिछले साल बॉक्स वितरण 1485
इस साल बॉक्स का वितरण 2700
पिछले साल जिले में शहद उत्पादन 520 क्विंटल
इस साल शहद उत्पादन का लक्ष्य 1080 क्विंटल
मधुमक्खी पालन के प्रति किसानों का रुझान बढ़ रहा है। सरसों, लीची आदि की अधिकता के कारण नवगछिया क्षेत्र मधुमक्खी पालन के लिए ज्यादा उपयुक्त है। – केके झा, जिला कृषि पदाधिकारी
