भागलपुर जिले से देश के लिए अच्छी खबर है। वर्ष 2016 से लड़कियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। जिले में लड़कियों के जन्म का औसत लड़कों से पार कर चुका है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!2011 की जनगणना के मुताबिक जिले में एक हजार लड़कों पर लड़कियों की संख्या 880 थी। जबकि, उस समय बिहार का औसत प्रति हजार लड़कों पर 918 और देश का औसत 940 था। जन्म के निबंधन की रिपोर्ट जिला सांख्यिकी विभाग ने मुख्यालय को भेजी है। जिले की सभी 242 पंचायतों, 2600 आंगनबाड़ी केन्द्रों के अलावा सभी सरकारी अस्पतालों, नगर निगम, नगर परिषद, नगर पंचायतों के माध्यम से हुए निबंधन के आधार पर रिपोर्ट तैयारी की गई है।
2011 की जनगणना के बाद सांख्यिकी विभाग द्वारा इसी आधार पर जन्म-मृत्यु का आंकड़ा निकाला जा रहा है। पिछले तीन साल के आंकड़ों को देखें तो लड़कों की तुलना में लड़कियों की जन्म दर में वृद्धि हुई है। इसका श्रेय लोगों में बेटियों के प्रति बढ़ी जागरूकता, सरकारी व गैर सरकारी अभियानों, भ्रूण हत्या और जांच पर सख्त कानूनी डंडे को दिया जा सकता है। काफी दिनों से सरकार और सामाजिक संगठनों के स्तर से लड़कियों के जन्म दर में वृद्धि को लेकर कई तरह के कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं।

सांख्यिकी विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 2016 में लड़कियों का जन्म दर लड़कों की तुलना में 48.21 प्रतिशत, 2017 में 49.24, 2018 में 50.16 और 2019 के अगस्त माह तक 49.89 प्रतिशत रहा है। यह बढ़ता ट्रेंड है। जिला सांख्यिकी पदाधिकारी शंभू राय ने बताया कि सभी स्रोतों से बच्चों के जन्म का आंकड़ा प्राप्त कर रिपोर्ट तैयार की जाती है। अगर एकाध बच्चों के जन्म की जानकारी छूट भी जाए तो इससे जन्म के रेशियो का बड़ा ट्रेंड तो माना ही जाएगा। छूटने में लड़का और लड़की दोनों हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि अब ऑनलाइन जन्म और मृत्यु की जानकारी नियमित रूप से भेजी जा रही है। लड़कियों के जन्म में वृद्धि जिले के लिए अच्छी बात है। 2011 की जनगणना की तुलना में लड़कियों के जन्म दर में काफी वृद्धि हुई है।

माता-पिता में आयी जागरूकता :
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ विभा चौधरी बताती हैं कि समाज में लड़कियों के प्रति भी सोच बदली है। लड़का-लड़की को समान रूप से देखा जा रहा है। अल्ट्रासाउंड को लेकर सख्त कानून बन चुका है। वहीं, डॉ. रोमा यादव बताती हैं कि लड़कियों के जन्म दर में वृद्धि का मुख्य कारण माता-पिता में जागरूकता और कानून के डर को जाता है। जिले की महिला चिकित्सकों ने भी लड़की होने पर गर्भपात नहीं करने को शपथ ली है।
