सहित्यकार भूदेव भूषण नहीं रहे

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भागलपुर : 22 जनवरी,भागलपुर के जाने माने कवि एवं साहित्यकार डॉक्टर भूदेव भूषण शर्मा का देहांत शनिवार की रात हो गया। वे 72 वर्ष के थे। पिछले चार वर्षों से वे लगातार बीमार चल रहे थे और पिछले दो वर्षों से वे लकवाग्रस्त भी थे। डॉक्टर भूदेव भूषण शर्मा कई दशकों तक भागलपुर के साहित्यिक मंचों की शोभा बढ़ाते रहे। उन्होंने साहित्य कर्म को एक विस्तार देने के किये कर्णभूमि मंच की स्थापना की थी। शांतचित्त एवं सदा हँसमुख रहने वाले डॉक्टर शर्मा ने लाइब्रेरी अटेंडेंट के रूप में भागलपुर विश्वविद्यालय में अपनी सेवा दी। डॉक्टर शर्मा का निधन हबीबपुर बढ़ई टोली स्थित आवास में हुई।
शब्दयात्रा मंच के संस्थापक एवं गजलकार पारस हरीकुंज ने डॉक्टर भूषण को अत्यंत मार्मिक श्रधांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने जिस ममत्व से भागलपुर के मंचों पर अनेक नये कवियों को लाया और उसे एक नए सांचे में ढालकर तैयार किया अब दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि कर्णभूमि संस्था के माध्यम से भागलपुर के दक्षिणी इलाकों में चल रही साहित्यिक गतिविधियों को एक बड़ा मंच दिया वे एक साथ निष्कपट निश्छल निस्वार्थ अध्ययनशील एवं आध्यात्मिक प्रवृति के साहित्यकार थे। आरम्भ में कुछ समय वे प्रउत आंदोलन से जुड़ गए बाद में सन्तमत की दीक्षा लेकर गेरुआ वस्त्र भी धारण कर लिया। श्री पारस ने कहा कि पिछले चार वर्षों से वे लगातार बीमार चल रहे थे। उन्होंने कहा कि भागलपुर के एक जिन्दा साहित्यकार को बीमारी की त्रासद मौत से मरते हमने देखा है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग बड़े बिरले ही होते हैं जो समाज के विकास के लिए जीते हैं। पारस हरिकुंज ने यह भी बताया कि उन्होंने होमियोपैथ की डिग्री ली थी और लोगों को मुफ्त में सेवा भाव से दवाइयां भी वितरण करते थे।
दिवंगत डॉक्टर भूदेव भूषण का अंतिम संस्कार रविवार को बरारी श्मशान घाट पर कर दिया गया जहाँ उनके छोटे पुत्र प्रवीण ने मुखाग्नि दी। डॉक्टर शर्मा अपने पीछे तीन पुत्र अमितेश, प्रभात एवं प्रवीण तथा दो पुत्रियां राखी और ऋतू छोड़ गए हैं।
इधर त्रैमासिक पत्रिका संभाव्य के स्थापना दिवस कार्यक्रम में भी दिवंगत डॉक्टर भूषण को आये हुए साहित्यकार एवं कवियों ने श्रद्धांजलि दी साथ ही दो मिनट का मौन धारण किया। श्रद्धांजलि देने वालों में जिला परिषद के अध्यक्ष टूनटून साह,बच्चू चौधरी अकेला, विष्णु मण्डल विकल, कवि महेंद्र मयंक, शेषावतार बाबा मनमौजी कर्ण अंगपुरी, दयानन्द जायसवाल, धीरज पंडित, डॉक्टर जयंत जलद, डॉक्टर प्रेमचंद पाण्डे, वरिष्ठ पत्रकार धर्मेंद्र कुसुम, जनसत्ता के वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत, अभय भारती, हीरा प्रसाद हरेंद्र, वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार, पत्रकार राजकुमार के साथ अन्य लोग शामिल थे।
अंग उत्थान आंदोलन समिति,बिहार-झारखंड के अध्यक्ष गौतम सुमन ने कहा कि डॉक्टर भूदेव भूषण के मन में अंगिका के विकास के लिए बहुत सपने थे और अंगिका भाषा की लड़ाई के लिए भागलपुर से पटना के लिए सन 2009 में रवाना हुए जत्था के पैदल यात्री भी थे। उन्होंने कहा कि अंगिका आंदोलन के लिए उन्होंने हमारे मंच के बैनर को सदा संरक्षण दिया और दिशा दी। पैदल यात्रा के दौरान भागलपुर से पटना तक अंगिका की एक से एक रचना भी सुनाई। गौतम सुमन ने यह भी कहा कि डॉक्टर भूषण की तमाम रचनाओं को संकलित कर पुस्तक के रूप में प्रकाशित की जायेगी।उन्होंने कहा कि भूषण जी के निधन हो जाने से उन्हें व्यक्तिगत व अपूरणीय क्षति हुई है ।

नोट : भगलपुर के युवा साहित्यविद और सामाजिक कार्यकर्ता गौतम सुमान द्वारा भेजे गए रिपोर्ट पर आधारित खबर।

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