बिहपुर में विसर्जन के दौरान हुआ मौत का तांडव चीख से कांप रही हैं गलियां -Naugachia News

ऋषव मिश्रा कृष्णा, नवगछिया:  सूरज की किरणों के धूमिल होते हैं जैसे ही अंधेरे ने अपना दायर बढ़ाना शुरू किया था कि कोरचक्का गांव की खुशियों को ग्रहण लगना शुरू हो गया. और कुछ देर पहले तक सिद्धी विनायक के जयकारों से गूंज रही गांव की गलियां कुछ देर बाद ही रुदन क्रंदन में डूब चुकी थी. गांव की हर गालियां गमगीन थी. गांव के अक्सर पुरुष या तो नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल गए थे या फिर पोखर के पास गया था. कुछ पुरुष व युवा जो गांव में थे वे एक जगह इक्ट्ठा होकर चुप चाप से बैठे थे. ग्रामीण विनोद सिंह, वकील सिंह, महेंद्र सिंह, मुन्ना सिंह, महेश्वर सिंह, लड्डू सिंह आदि अन्य कुछ युवा कुछ भी बोल पाने की स्थिति में नहीं थे. यह लोग इतना ही बता पाए की यह घटना उन लोगों के गांव के लिए एक बहुत बड़ी त्रासदी के समान है. कई नौनिहाल जिनको आज भी खेलते कूदते देखा आज उनके सब को देखना उनलोगों के लिए सहज नहीं रहा. देर रात गांव में किसी घर में चूल्हा नहीं जला. ग्रामीणों ने कहा कि जिन परिवारों के बच्चे इस घटना में मारे गए वह आर्थिक रुप से काफी विपन्न परिवार है. सभी मेहनत मजदूरी कर अपना जीवन यापन करते हैं.
पिछले वर्ष में शुरू किया गया था पूजनोत्सव, प्रशासनिक स्तर पर नहीं दी गई थी कोई सूचना

कोरचक्का में गांव के किशोर व उम्र के लड़कों को युवाओं ने ही पिछले वर्ष से गणेश चतुर्दशी पर प्रतिमा स्थापित कर तीन दिवसीय पूजनोत्सव करने का निर्णय लिया था. पिछले वर्ष यह आयोजन पूरी तरह से सफल रहा था. पिछले वर्ष की सफलता से प्रेरित होकर युवकों ने इस बार भी बढ़ चढ़कर पूजनोत्सव मनाने का निर्णय लिया था. 2 दिनों तक रात में भजन संध्या का आयोजन भी स्थानीय गायकों द्वारा किया गया था. विगत वर्षों में नवगछिया में कई जगहों पर गणेश चतुर्दशी पर भगवान सिद्धिविनायक की प्रतिमा स्थापित कर दो दिवसीय या तीन दिवसीय पूजा अर्चना करने का चलन शुरु हुआ है. परंपरागत तौर पर देखा जाए तो अमूमन नवगछिया में गणेश चतुर्दशी पर गणेश पूजन की परंपरा विगत सालों में नहीं के बराबर थी. यहां पर गणेश चतुर्दशी को चौथ चंदा के रूप में मनाया जाता है. लोग चंद्रदेव को अर्घ्यदान करते हैं और इसी के साथ यह पर्व समाप्त हो जाता है.

यही कारण है कि गणेश चतुर्दशी पर ना कोई प्रशासनिक तैयारी की जाती है और ना ही पुलिस के स्तर से किसी प्रकार की चौकसी बरती जाती है. इस बार नवगछिया में करीब 25 नए जगहों पर भगवान सिद्धिविनायक की प्रतिमा स्थापित कर दो दिवसीय या तीन दिवसीय पूजनोत्सव शुरू किया गया है. गणेश चतुर्दशी परंपरागत त्योहार में नहीं आने के कारण ही प्रशासनिक रूप से इसकी किसी प्रकार की तैयारी नहीं की गयी. दूसरी तरफ प्रशासनिक पदाधिकारियों का अस्पष्ट निर्देश है कि अगर किसी गांव में इस तरह के आयोजन हो तो उसकी सूचना प्रशासन को दी जाए और प्रशासन सुरक्षा व विधि व्यवस्था के दृष्टिकोण से सारे इंतजाम कर लेगा.

शाम बजे गणपति बप्पा मोरिया के नारों के साथ गांव से प्रतिमा को लेकर रवाना हुई थी टोली

ग्रामीणों ने बताया कि गणेश पूजन का आयोजन किए जाने से पूरे गांव में उत्साह का माहौल था. शाम को करीब 4:00 बजे युवाओं और किशोरों में उत्साह के साथ भगवान सिद्धिविनायक की प्रतिमा को एक विसर्जन यात्रा का रूप देते हुए, गणपति बप्पा मोरिया के नारों के साथ गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर मड़वा के कलबलिया धार की ओर निकले थे. खासकर बच्चे इतने उत्साहित थे कि वह रंग अबीर के साथ सराबोर हो गए थे और आतिशबाजी भी कर रहे.

गांव की महिलाओं और युवतियों ने कहा कि उन लोगों ने सड़क पर तब तक विसर्जन जुलूस देखा जब तक वे उन लोगों की आंखों से ओझल नहीं हो गए. कुछ देर बाद ही ग्रामीणों के मोबाइल पर फोन आने शुरू हो गए. बात सामने आई कि 10 बच्चे डूब कर मर गए हैं. इसके बाद गांव का हुजूम मरवा गांव स्थित सड़क किनारे के पोखर के पास छूट गया. देखते ही देखते बच्चों के सब एक के बाद एक निकलते चले गए. रुदन क्रंदन से वातावरण गमगीन हो गया था. प्रकृति के इस क्रूड मजाक पर हर कोई गमगीन था और हर किसी की आंखें नम थी.

कलश के नारियल को लूटने के क्रम में असंतुलित हो बच्चे पोखर के अथाह पानी में चले गए

विसर्जन के समय स्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि घटना का कारण नारियल को लूटने के क्रम में घटी. कलश के साथ स्थापित किए गए नारियल को एक युवक ने पोखर के किनारे ही गणपति बप्पा मोरिया का नारा लगाते हुए फेंक दिया. इसके बाद कुछ युवाओं व किशोरों का हुजूम उस नारियल को लूटने के लिए टूट पड़ा. इसी क्रम में एक के बाद एक बच्चे असंतुलित होते गए और अथाह पानी में डूबते चले गए. जब तक मौके पर मौजूद लोग कुछ कर पाते तब तक बड़ी संख्या में बच्चे पानी में विलीन हो चुके थे.

एक दो बच्चों को सुरक्षित निकाला भी गया. ग्रामीणों का कहना था कि विसर्जन जुलूस में ज्यादातर किशोर वह उम्र के ही लड़के थे. कुछ युवा थे. अगर विसर्जन जुलूस में अभिभावक वह बुजुर्ग साथ आते तो इस तरह की घटना को रोका जा सकता था. विसर्जन जुलूस में शामिल कुछ युवकों ने बताया कि उन लोगों को अंदाजा नहीं था कि पोखर में अथाह पानी है. अगर उन लोगों को इस बात का जरा भी अंदाजा होता की पोखर में डूबने के लायक पानी है तो वह लोग सावधानी बरत लेते.

चार बच्चों के लापता होने की है सूचना
5 बच्चों का शव निकाले जाने के बाद देर रात तक पुलिस व प्रशासनिक स्तर से की गई छानबीन में पता चला है कि अभी भी चार बच्चे लापता है. ग्रामीण पक्के तौर पर कह रहे हैं कि यह चारों बच्चे विसर्जन जुलूस में ही गए हैं और पानी में डूब गए हैं. देर रात तक मौके पर कैंप कर रहे नवगछिया के अनुमंडल पदाधिकारी डॉक्टर आदित्य प्रकाश, नवगछिया के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मुकुल कुमार रंजन, नारायणपुर भागलपुर के वीडियो सत्येंद्र कुमार अन्य पदाधिकारी भी एनडीआरएफ की टीम के सहयोग से पोखर में डूबे बच्चों के सब को ढूंढने का प्रयास किया जा रहा था.
ये बच्चे हैं लापता
सभी लापता बच्चे भी कोरचक्का गांव के ही है. ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार मुकुंद लहरी का पुत्र ननकू कुमार, उमेश सिंह का पुत्र आशीष कुमार, विजय सिंह का पुत्र विशाल कुमार और भीखन शाह का पुत्र गौरव कुमार लापता बताया जा रहा है. ग्रामीणों ने आशंका जाहिर करते हुए कहा कि रात का समय है हो सकता है कि गांव के और भी बच्चे गायब हो. देर रात पोखर से मृत अवस्था में निकले गए बच्चों के शव को पोस्टमार्टम के लिए नवगछिया अनुमंडल अस्पताल ले जाया गया था.
सभी हुए गमगीन व्यक्त किया शोक संवेदना
एक साथ पांच बच्चे की मौत और 4 बच्चे के गायब होने की सूचना पर पूरा नवगछिया आहत है. बिहपुर विधानसभा के पूर्व विधायक इंजीनियर कुमार शैलेंद्र, भाजपा जिला अध्यक्ष विनोद कुमार मंडल, भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी विजेंद्र शर्मा, भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रवीण कुमार भगत, कांग्रेस नेता जिला पार्षद गौरव राय, युवा राजद के प्रदेश प्रवक्ता अरुण कुमार यादव, युवा नेता आलोक कुमार सिंह बंटू, छात्र नेता सज्जन भारद्वाज आदि ने संवेदना व्यक्त करते हुए प्रशासन से पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद देने की मांग की है

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