गांव से उठी एक साथ कई अर्थी, युवकों ने किया तौबा : नहीं होगा किसी तरह का पूजनोत्सव-Naugachia News

ऋषव मिश्रा कृष्णा, नवगछिया : बिहपुर के कोरचक्का गांव में विसर्जन के क्रम में आठ परिवारों के नौ किशोरवय उम्र के बच्चों के एक साथ डूब जाने के बाद पूरे गांव की स्थिति हृदयविदारक है. गांव की हरेक गलियां गमगीन हैं और परिजनों के चीख पुकार लगातार जारी है. सोमवार को देर शाम भी गांव का कोई भी ऐसा स्थान नहीं था जहां पर मृतक के परिजनों का रूदन क्रंदन नहीं सुनाई देता हो. रूदन क्रंदन का सिलसिला देर रात तक जारी था.

उजड़ गयी रूबी देवी की दुनियां

हादसे में डूब कर मरे आठवीं कक्षा के छात्र राहुल कुमार अपनी मां रुबी देवी और पिता बबलू सिंह का इकलौता पुत्र था. राहुल के अलावा बबलू को पांच बेटियां ही हैं और सभी राहुल से छोटी थी. पहला व इकलौता पुत्र होने के कारण उसको लेकर उसके माता पिता और बहनों ने कई तरह के सपने संजोये थे. राहुल की मां रो रो कर गवई अंदाज में कह रही थी कि उसने अपने पुत्र को लेकर कई सपने संजोये थे. उसे लगता था कि उसके पास बहुत कुछ है लेकिन अब आंसू के सिवा कुछ भी न बचा.

बिट्टू और छोटू की मां कैसे मान ले कि अब दोनों इस दुनियां में नहीं है

विवेका सिंह और विमला देवी के दो पुत्र उक्त हादसे में मारे गये हैं. सुबह जब विमला देवी ने अपने दोनों पुत्रों के शव को देखा तो उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि अब उसके दोनों पुत्र इस दुनियां में नहीं रहे. वह दहाड़ मार कर रो रही थी और बार बार दोनों को उठने को कह रही थी. मालूम हो कि चार भाईयों में सुरेंद्र दोनों मृतकों भाईयों से बड़ा है तो सन्नी कुमार दोनों से छोटा है. बिट्टू और छोटू की चार बहनों का भी रो रो कर बुरा हाल है.

सौरभ की मां का था बुरा हाल

आठवीं कक्षा का ही छात्र सौरव कुमार की मां टिंकी देवी का रोते रोते बुरा हाल था. वह बराबर गश खा कर गिर जाती थी. आस पास की महिलाएं उसे सहारा दे रही थी. वह होश में आने के साथ ही चीख चीख कर अपने पुत्र का नाम पुकारने लगती थी. मालूम हो कि सौरभ कुमार संजय कहार का पहला पुत्र था. गांव के लोगों ने बताया कि सभी संतानों में बड़ा होने के कारण सौरभ का घर में खूब चलता था. सौरभ के छोटे भाई कारण और आयुष, बहन शिवानी कुमारी का भी रो रो कर हाल बुरा था.

सौरभ साह से थी परिजनों को काफी उम्मीदें

नौंवी कक्षा का छात्र सौरभ कुमार पढ़ने में ठीक ठाक था. इस कारण पूरे परिवार को उससे काफी उम्मीदें थी. सौरभ में नेतृत्व क्षमता भी थी. पूजनोत्सव में उसने बढ़ चढ़ कर भाग लिया था. अपने चार भाइयों में वह दूसरे नंबर का था. सौरभ के पिता एतवारी साह उर्फ भीखो साह मजदूरी करते थे. वह अक्सर गांव के लोगों को बोला करते थे कि उसे लगता है कि उसका यह पुत्र ही उसक ी जिम्मेदारी को संभाल लेगा. सौरभ की मां रीता देवी सदमें के कारण बीमार हो गयी हैं.

काफी बहादुर था निरंजन

विसर्जन के दौड़ान डूब कर मरे आठवीं कक्षा के छात्र निरंजन कुमार यादव के बारे में उसके दोस्तों का कहना है कि निरंजन काफी निडर और साहसी था. शायद वह तैरना भी जानता था लेकिन डूब रहे दूसरे लड़कों द्वारा निरंजन को खींच लिये जाने के कारण वह तैर भी न पाया. निरंजन के पिता शिवनंदन यादव भाड़े पर आॅटो रिक्शा चला कर अपना गुजर बशर कर रहे हैं. परिवार का सबसे बड़ा लड़का होने के कारण निरंजन से सबों को काफी उम्मीदें थी. निरंजन के छोटो भाई राजकुमार, मां सुमित्रा देवी और दोनों बहनों का रो रो कर बुरा हाल है.

भगवान को कोस रही है विशाल की मां

विजय सिंह और गौरवा देवी के पुत्र आठवीं कक्षा का छात्र विशाल कुमार पढ़ाई लिखाई में होनहार था. उसके घर के ठीक सामने ही पूजनोत्सव का मंडप बनाया गया था. विशाल की मां का रो रो कर बुरा हाल है. वह रोने के क्रम में कहती थी. हे भगवान अगर हमको पता होता कि आपसे हमारे घर की खुशी नहीं देखी जायेगी तो आपको घर के आगे कभी स्थापित ही न होने देती. विशाल दो भाइयों में सबसे बड़ा था. विशाल के भाई कुशाल कुमार, मुस्कान कुमारी, रुची कुमारी भी अपने भाई को याद कर निरंतर रो रही है.

बार बार आशीष को पुकार रही है उसकी मां

हादसे के शिकार हुए आठवीं कक्षा के छात्र आशीष की मां मनोरमा देवी घटना के 24 घंटे बाद भी रह रह कर अपने पुत्र को इस तरह आवाज देती है मानो उसका पुत्र पास ही खड़ा है. आशीष अपनी मां का काफी दुलाड़ा था. आशीष के बड़े विक्की कुमार, बहन रुपम, जूली, पिता उमेश सिंह भी गहरे सदमे हैं.

परिवार में सबका दुलारा  था नन्हकू

नौवी कक्षा का छात्र अपने परिवार में सबसे छोटा था. इसी कारण परिवार के सभी लोग उससे प्यार करते थे. पढ़ने में तेज होने के कारण उसकी मनमानी भी खूब चलती थी. गमगीन विकास का कहना है कि उसका मोबाइल अक्सर नन्हकू के पास ही रहता था. अब जब वह अपना मोबाइल देखता है तो उसमें नन्हकू का फोटो भरा पड़ा है. उसे मोबाइल देखने का मन नहीं कर रहा है. मालूम हो कि नन्हकू के पिता बिहार पुलिस में कांस्टेबल हैं. इन दिनों वे मोतीहारी में कार्यरत हैं. नन्हकू की मां पूनम देवी घटना के बाद से ही लगातार रो रही है. परिवार के सभी सदस्य गहरे सदमे में हैं.

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