पटना: बिहार के 3.7 लाख नियोजित शिक्षकों के ‘समान काम समान वेतन’ की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई लगातार जारी है. गुरुवार को इस मसले पर फिर से सुनवाई हुई. अब अगली तारीख 11 सितंबर तय की गयी है.
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इससे पहले सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से शिक्षकों के साथ वेतन में असमानता को लेकर सवाल किया था. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि शिक्षकों के वेतन में असमानता कब दूर होगी. इस दौरान जस्टिस एएम सप्रे और यूयू ललित की पीठ के समक्ष अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बहस की. अटॉर्नी जनरल ने बहस के दौरान ये दलील दी कि राज्य सरकार को केंद्र द्वारा अतिरिक्त आर्थिक सहायता देना संभव नहीं है. ऐसा करने पर दूसरे राज्यों से भी यही मांगें उठेगी.

अटॉर्नी जनरल के इस सवाल पर कोर्ट ने ये पूछा कि जिन राज्यों में वेतनमान की समानता है, क्या उन राज्यों ने इसके लिए केंद्र सरकार से कोई मांग या सवाल किए हैं. अगर किए हैं तो सरकार ने उन्हें क्या दलील दिया है. कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से ये भी पूछा कि शिक्षकों की कमी को लेकर सरकार की क्या योजना है. इस पर अटॉर्नी जनरल आज सुनवाई के दौरान जवाब दे सकते हैं.

बता दें कि, कोर्ट ने इस मसले पर अब तक राज्य सरकार का पक्ष सुना है. अब शिक्षक संगठनों के वकील अपना पक्ष रख रहे हैं. समान काम के लिए समान वेतन की मांग को लेकर पटना हाई कोर्ट ने शिक्षकों के हक में फैसला सुनाया था. इसके बाद राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. इससे पहले केंद्र सरकार ने बिहार सरकार का समर्थन करते हुए समान कार्य के लिए समान वेतन का विरोध किया था.
सरकार के हलफनामे में कहा गया कि नियोजित शिक्षकों को समान कार्य के लिए समान वेतन नहीं दिया जा सकता है. कोर्ट में पूर्व में सौंपी गई रिपोर्ट में सरकार ने यह कहा है कि वह प्रदेश के नियोजित शिक्षकों को महज 20 फीसद की वेतन वृद्धि दे सकती है
