भागलपुर ICON : हेडमास्टर निभा डे अपने खर्चे से दे रहीं कॉन्वेंट जैसी शिक्षा… लोग कर रहे है खूब तारीफ

सरकारी स्कूलों में शिक्षा का गिरता स्तर जहां सरकार के लिए चिंता का विषय है, वहीं दूसरी ओर शहर में एक ऐसा भी स्कूल है जिसमें स्वयं हेडमास्टर अपने खर्चे पर बच्चों को कान्वेंट जैसी शिक्षा दे रही हैं। भीखनपुर स्थित मध्य विद्यालय की हेडमास्टर निभा डे ने शिक्षा के स्तर को उठाने के लिए अपनी ओर से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने बेहतरीन शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ बच्चों को पीने का साफ पानी, कंप्यूटर, सीसीटीवी कैमरे और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करवाई हैं। यह सब सिर्फ इसलिए कि बच्चे कान्वेंट स्कूल जैसे माहौल के बीच अपना भविष्य गढ़ सकें।

भीखनपुर गुमटी नंबर-12 के समीप स्थित इस स्कूल में बच्चों को 8वीं पास करने के पहले इंग्लिश की बेसिक जानकारी से लेकर कंप्यूटर ऑपरेट करने में दक्ष बनाया जाता है। स्कूल में हर क्लास के बाहर शिक्षक का नाम चस्पा किया गया है। सूचना पट्ट पर उपस्थित रहने वाले बच्चों की संख्या व टीचरों का नाम रोजाना अपडेट किया जाता है।

अच्छी पहल : भीखनपुर स्थित मध्य विद्यालय की बदल डाली सूरत

हेडमास्टर होने के बावजूद वह विज्ञान की कक्षाएं नियमित रूप से लेती हैं।
सरकारी मदद का नहीं किया इंतजार

निभा डे ने किसी एनजीओ या सरकारी मदद का इंतजार नहीं किया। बचत के पैसे से स्कूल में ऐसे बदलाव किए जिससे यह बाकी स्कूलों के लिए उदाहरण बन सके। 2015 में प्राचार्य बनते ही स्कूल में प्याऊ व एमडीएम की रसोई में मार्बल फ्लोर की व्यवस्था कराई है। यह देख एसबीआई ने यहां पीने के लिए आरओ लगवाया।

खुद लगवाए कंप्यूटर व सीसीटीवी कैमरे

विज्ञान शिक्षिका डे ने अपने पैसे से स्कूल में कंप्यूटर भी लगाया। सीसीटीवी कैमरे भी लगाए। अनुपस्थिति में भी स्कूल के संचालन पर नजर व बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सीसीटीवी कैमर से निगरानी करती हैं।

बचपन से थी लगन, बदलना है शिक्षा का स्तर, कर दिखाया

सहरसा की मूल निवासी निभा डे अपने गांव गोसपुर की पहली छात्रा थीं जो 10वीं से आगे की पढ़ाई के लिए गांव से बाहर गईं। उस समय उनके गांव में 10वीं से अधिक की पढ़ाई की व्यवस्था नहीं थी। जब उन्होंने गांव से बाहर पढ़ाई का निर्णय लिया तो पिता को काफी विरोध का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने ठान लिया कि वह टीचर बनकर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देंगी। 2000 में शिक्षक के तौर पर नौकरी ज्वाइन कीं। मार्च 2008 में भीखनपुर मवि.में टीचर बनीं व दिसंबर 2018 से यहां हेडमास्टर हैं। निभा डे मानती हैं कि जीवन में अनुशासन जरूरी है।

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