नवरात्रि : मां के डोली पर आगमन से बढ़ेंगी परेशानियां, हाथी पर प्रस्थान रहेगा शुभ.. पहले दिन हुई स्थापना तो हो गई दुर्घटना

नवगछिया : शारदीय नवरात्र की शुरुआत 7 अक्टूबर से होगी। पंचमी और षष्ठी तिथि एक ही दिन (11 अक्टूबर) पड़ने के कारण इस वर्ष नवरात्र आठ दिनों का ही हो रहा है। सात अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 10 मिनट के बाद कलश स्थापना का मुहूर्त बन रहा है जो दोपहर 3 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। 11 अक्टूबर षष्ठी तिथि को बिल्वा निमंत्रण दिया जाएगा।

 


 7 अक्टूबर से होगी नवरात्र की शुरुआत, 15 को विजयादशमी
सुबह 6.10 से अपराह्न 3. 37 बजे तक कर सकते हैं कलश स्थापना

12 अक्टूबर (सप्तमी) को सुबह बिल्वा तोड़ी की पूजन के बाद मां दुर्गा का पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। 13 अक्टूबर को महाष्टमी है, जबकि 14 अक्टूबर को महानवमी, कुमारी पूजन, हवन आदि कार्यक्रम होंगे। 15 अक्टूबर को विजयादशमी, नवरात्र व्रत पारण, देवी प्रतिमा विसर्जन, अपराजिता पूजा, शमी पूजा, निलकंठ दर्शन का मुहूर्त बन रहा है।

 

डोली पर आगमन, हाथी पर प्रस्थान

ज्योतिषाचार्य दयानंद पाण्डेय कहते है महिषासुर मर्दिनी का आगमन डोली पर हो रहा है। शास्त्रत्त् मर्मज्ञ इस माध्यम से मां का आना अच्छा नहीं मान रहे। ज्योतिषाचार्य श्रीराम पाठक माता की सवारी को लेकर कहते हैं कि ‘डोलायां मरणं ध्रुवम’ मतलब डोली से आने वाली माता प्राकृतिक आपदा, महामारी आदि की तरफ इशारा करती हैं। हालांकि मां की विदाई हाथी पर हो रही है। आचार्य इसे शुभ सौभाग्य सूचक मानते हैं। वे कहते हैं कि हाथी पर जिस वर्ष विदाई होती है उस साल अच्छी वर्षा होती है। पूरे वर्ष तरह-तरह के शुभफल प्राप्त होते हैं।

नवरात्र में पटना के शेखपुरा बेली रोड स्थित शेखपुरा दुर्गाश्रम बेली रोड में माता की प्रतिमा का दर्शन करने लाखों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। पटना का यह एकमात्र ऐसा पूजा पंडाल है जहां कलश की स्थापना प्रथमा को नहीं बल्कि पंचमी को होती है। बीते 82 वर्षों में ऐसा केवल दो बार 1992 और 1994 में हुआ जब कलश की स्थापना प्रथम शैलपुत्री के आह्वान के साथ हुआ। तब 1992 में मूर्ति में आग लग गई थी। वहीं 1994 में पंडाल के गेट में आग लग गयी। इसके बाद आयोजकों ने पुरानी परंपरा का ही पालन करते हुए कलश की स्थापना पंचमी को करते हैं।

दुर्गाश्रम, शेखपुरा बेली रोड में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना 1939 से हो रही है। यहां ‘श्रीश्री दुर्गा पूजा समिति शेखपुरा दुर्गाश्रम बेली रोड’ के बैनर तले पूजा हो रही है। पहले यहां माता का पिंड था। नवरात्र के समय यहां मेला लगता था। माता के पिंड की पूजा के लिए यहां दूर-दूर से लोग आते थे। इस जगह के नाम पर ही शेखपुरा मोड़ का नाम कालका मोड़ रखा गया था। अब भी यह मान्यता है कि विसर्जन के लिए कालका मोड़ पर मूर्तियों को पांच मिनट तक के लिए रोका जाता है। फिर मूर्तियों को आगे ले जाया जाता है।


तरह-तरह की झांकियां

दुर्गाश्रम बेली रोड अपने प्रयोगिक झांकियों और पंडालों के लिए भी हमेशा चर्चा में रहा है। 2013 में यहां भगवान शंकर की जटा से निकलने वाली मां गंगा को माता दुर्गा द्वारा रोकने की झांकी को श्रद्धालुओं ने खूब पसंद किया था। इसी तरह एक बार वैष्णव माता की गुफा में मौजूद ज्वाला देवी द्वारा नारद जी के पुकार पर राक्षस के वध करने की झांकी भी लोगों को पसंद आयी थी। इसके अलावा विष्णु भगवान द्वारा पहाड़ को चीरते हुए निकलने, शराबबंदी और दशरथ मांझी के पहाड़ काटने की झांकियों की भी पटना और राज्य में खूब चर्चा हुई थी।

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