धर्म-आध्यात्म : इस बार सावन में चार सोमवार, 26 को पहली सोमवारी

श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। इस मास में अगर प्रत्येक दिन पूजन नही कर सके तो उन्हें सोमवार को शिव की पूजा अवश्य करनी चाहिए। सोमवार को व्रत रखकर शिव आराधना, अभिषेक इत्यादि करनी चाहिए। श्रावण मास में जितने भी सोमवार पड़ते हैं, उन सब में शिवजी का व्रतोपवास किया जाता है। इस व्रत में प्रातः स्नान, गंगा स्नान अन्यथा किसी पवित्र नदी, सरोवर या विधि पूर्वक घर पर ही स्नान करके शिवालय जाकर यथा विधि षोडशोपचार पूजन, अभिषेकादि करना चाहिए। इसके बाद श्रावण मास महात्म्य शिव महापुराण की कथा सुनने का भी विशेष महत्व है। भगवान शिव का यह व्रत सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करता है। इस मास में की गई साधना पूर्ण फलदायी होती है। क्योंकि इस मास का प्रत्येक दिवस सर्वकामना सिद्धि प्रदायक अमृत महोत्सव की गरिमा को अपने अंदर समेटे हुए होता है। यह जानकारी गोसपुर निवासी आचार्य धर्मेन्द्र नाथ शास्त्री ने दी।

श्रावण मास में शिव की आराधना से सारी मनोकामनाएं होती है पूर्ण

आचार्य ने बताया कि श्रावण मास भूतभावन भोलेनाथ का मास है। इस पूरे मास में अगर श्रद्धापूर्ण एवं विधि पूर्वक दूध, दही, घी, मधु, गुड़, पंचामृत, भांग इत्यादि द्वारा पूजा-आराधना किया जाए तो निश्चित रूप से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इस मास में की गई साधना द्वारा ना केवल भगवान शिव की कृपा होती है। अपितु उस व्यक्ति पर पूर्ण जीवन काल तक अन्नपूर्णा के साथ भगवती लक्ष्मी मां की कृपा बनी रहती है। क्योंकि मां पार्वती स्वयं अन्नपूर्णा लक्ष्मी स्वरूपा है। यह आवश्यक नहीं कि किसी समस्या या पीड़ा के समय ही ईश्वर को याद किया जाए। बिना किसी आवश्यकता के भी हमें ईश्वर को याद करना चाहिए।

जनकल्याण और मोक्ष के लिए शिव आराधना शुभ कल्याणकारी

जनकल्याण एवं मोक्ष के लिए शिव आराधना शुभ कल्याणकारी है। इसलिए श्रावण मास का इंतजार सभी वर्ग उत्सुकता के साथ करते हैं। एक ओर जहां श्रावण के महीने में चारों और प्राकृतिक हरियाली, रिमझिम बरसती बरसात की बूंदें मन को अतिशय शांति प्रदान करती है। शिव तत्व की प्राप्ति के लिए श्रावण माह से अधिक कोई अन्य तत्व नहीं है। गोसपुर निवासी आचार्य पंडित धर्मेंद्र नाथ ने बताया कि इस बार श्रावण मास में चार सोमवार का योग है। प्रथम सोमवारी 26 जुलाई, दूसरी सोमवारी -02, तीसरी सोमवारी 09 एवं चौथी सोमवारी- 16 अगस्त को सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ विश्राम होगा। श्रावणी पूर्णिमा 22 अगस्त को को होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

चोर चोर चोर.. कॉपी कर रहा है