कोरोना का वायरस न केवल फेफड़ा, हृदय बल्कि दिमाग पर अपना नकारात्मक असर दिखा रहा

भागलपुर, कोरोना का वायरस न केवल फेफड़ा, हृदय बल्कि मस्तिष्क (दिमाग) पर अपना नकारात्मक असर दिखा रहा है। आलम यह है कि कोरोना का वायरस दिमाग की तंत्रिकाओं के सर्किट को बिगाड़ रहा है, जिससे कि कोरोना से ठीक होने के बावजूद पोस्ट कोविड मरीजों के न केवल व्यवहार में परिवर्तन हो रहा है बल्कि उन्हें दिमागी व शारीरिक समस्याओं से उन्हें जूझना पड़ रहा है।

जेई-मेनिन्जाइटिस वाली बीमारी अब पोस्ट कोविड मरीजों में:

जेएलएनएमसीएच के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हेमशंकर शर्मा कहते हैं कि दिमाग की तंत्रिकाओं के सर्किट पर कोरोना के वायरस द्वारा प्रहार किये जाने के कारण पोस्ट कोरोना संक्रमितों में डेलीरियम नामक बीमारी हो रही है, जो कि आमतौर पर जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) और मेनिन्जाइटिस के मरीजों में पायी जाती है। दोनों प्रकार के मरीज को एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एइएस) के तहत रखा जाता है। डेलीरियम नामक बीमारी में मरीज के दिमाग की झिल्ली में संक्रमण और सूजन हो जाती है। इससे दिमाग में संक्रमण या सूजन हो जाता है। कोरोना संक्रमण का असर कुछ ऐसा ही कोरोना से जंग जीतने वालों पर दिख रहा है। दिमाग की तंत्रिकाओं में रक्त प्रवाह की गति धीमी हो जा रही है। ब्लड क्लाटिंग के कारण दिमाग की धमनियों में रक्त के थक्के जम जा रहे हैं। दिमाग की मांसपेशियों में इंफेक्शन होने के कारण पोस्ट कोविड मरीजों का दिमागी संतुलन बिगड़ जा रहा है। इससे वे अक्सर भ्रम की स्थिति में रह रहे हैं। अब तक इस तरह के मामले जेएलएनएमसीएच में इलाज के लिए आये 13 पोस्ट कोविड मरीजों में पाया जा चुका है। इसकी पुष्टि पोस्ट कोविड मरीजों का सिटी स्कैन कराने के बाद हुई।

पोस्ट कोविड मरीजों के व्यवहार में आ रहा परिवर्तन

न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विकास शर्मा ने बताया कि डेलीरियम भ्रम की बीमारी है। इसमें मरीज के व्यवहार में परिवर्तन हो जाता है। पोस्ट कोविड मरीजों में भी डेलीरियम बीमारी के कारण उनके व्यवहार में परिवर्तन दिख रहा है। कोरोना संक्रमण से उबरे लोग या तो बहुत सक्रिय (हाइपर एक्टिव) या फिर बेहद सुस्त रहने लगे हैं। बात करते वक्त उनकी आवाज या तो बहुत तेज या फिर बहुत धीमी हो जाती है। इसके अलावा उनमें सिर दर्द, बेचैनी, घबराहट के लक्षण पाये जा रहे हैं। यहां तक उनमें निर्णय लेने की क्षमता में कमी आ जाती है। खास बात यह कि ये लक्षण उनके शरीर में इंफेक्शन होने को प्रमाणित करते हैं। ऐसे लोगों को तत्काल न्यूरोलॉजिस्ट को दिखाना चाहिए।

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