आठ नवंबर काे देवाेत्थान एकादशी के बाद फिर शुरू हो जाएंगे मांगलिक कार्य, मई में 12 दिन

शादी-विवाह काे लेकर बाजार में भी चहल-पहल तेज हाे गर्इ है। मर्इ से जुलाई तक बैशाख, जेठ की तपती धूप से लेकर आषाढ़ की बारिश का भी सामना करना पड़ेगा। खासकर इस मौसम में शादी-विवाह करने वाले परिवारों को लग्न एवं मुहूर्त इस साल काफी कम है। इस साल मई से जुलाई तक शादी के केवल 25 दिन शुभ मुहूर्त हैं। इनमें सबसे अधिक मई में 12 दिन अाैर सबसे कम जुलाई में चार दिन शुभ मुहूर्त हैं।

जबकि जून माह में 9 दिन शादी-विवाह के लिए शुभ मुहूर्त हैं। 11 जुलाई के बाद विवाह के कार्यक्रम पर पूरी तरह रोक लग जाएगा। इसके बाद फिर 8 नवम्बर को देवोत्थान एकादशी से मांगलिक कार्य शुरू हाेंगे। बूढ़ानाथ मान मंदिर के पंडित रमेश झा ने बताया कि मर्इ से जुलाई के तीन महीने में मांगलिक कार्य के लिए 25 शुभ मुहूर्त हैं। ऐसे में इस अवधि में चूक गए तो फिर नवम्बर में शादी का मौका मिलेगा। पिछले साल की तुलना में इस बार विवाह के मुहूर्त कम हैं। मई व जून में पिछला साल से विवाह के चार मुहूर्त कम हैं।

मई में 12 दिन विवाह के लिए मुहूर्त

सौर मास के अनुसार भगवान सूर्य के मीन राशि में प्रवेश होने से चैत्र खरमास शुरू होता है। सूर्य के मेष राशि में आने से इसका समापन होता है। बीत चुके चैत्र को शुभ और लगनिया कहा जाता है। लेकिन इस बार भी मई में विवाह के सबसे ज्यादा मुहूर्त हैं। इस माह में शादी-विवाह के लिए 12 दिन मांगलिक मुहूर्त हैं। जिसमें 6, 7, 8 12, 13, 14, 17, 18, 19, 23, 29, 30 मई को 24 घंटे का शुभ मुहूर्त है। वहीं जून में 8, 9, 10, 11, 12, 16, 24, 25, 27 को शुभ लग्न है। जबकि जुलाई में सबसे कम चार दिन ही विवाह के लिए शुभ मुहूर्त हैं। इस माह में 7, 8, 10, अाैर 11 जुलाई को ही लग्न के लिए मुहूर्त हैं।

शादी पर पड़ता है ग्रहों का प्रभाव

बूढ़ानाथ मान मंदिर के पंडित रमेश झा के अनुसार ग्रहों का प्रभाव शादी-विवाह पर भी होता है। शुक्र के अस्त होने पर मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए। 11 जुलाई के बाद तीन महीने के लिए शुक्र अस्त हो जाएगा। ज गुरु के उदय होने पर शादी-विवाह का कार्यक्रम शुरू होता है। इसके बाद हरिशयनी दोष से मांगलिक कार्य नहीं होगा।

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