ज्योतिष शास्त्र ने बताया, क्यों होती है विवाह में देरी

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शादी कब होगी? यह एक ऐसा प्रश्न है जिसे हर युवा अपने युवावस्था के दौरान पूछता है जो शादी के योग्य हो चुका है। हमारे समाज के लिए यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। भारतीय समाज में बच्चें के जन्म के साथ ही माता पिता उसकी शादी के सपने संजोने लगते हैं। माता पिता उसके लिए योग्य वर या कन्या तलाशने लगते हैं। परन्तु यह तलाश जब लम्बी होने लगती है तो मन में प्रश्न उठने लगता है शादी कब होगी? यह संभव सी बात है। हम अक्सर सुनते आए हैं कि रिश्ते ईश्वर द्वारा निर्धारित करता हैं। लेकिन माता पिता अपने कर्तव्यों को पूरा करते हुए बच्चों के घर बसाने के लिए चिंता करते है। ग्रह की स्थिति अनुकूल होती है तो अपने आप उनकी चिंता का निवारण हो जाता है।

ज्योतिषीय शास्त्र में विवाह के विषय में सप्तम भाव और सप्तमेश के साथ विवाह के कारक बृहस्पति और शुक्र की स्थिति को देखा जाता है सप्तम भाव और सप्तमेश अशुभ ग्रहों के द्वारा पीड़ित हो अथवा कमजोर स्थिति में हो तो विवाह में विलम्ब की संभावना रहती है। लग्न और लग्नेश भी इस विषय में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

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