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दिल्ली सरकार के हाल में बनाए नए मसौदा नियमों के अनुसार, राजधानी में 15 साल से ज्यादा पुराने सभी वाहन जब्त कर कबाड़ व्यापारियों के पास भेज दिए जाएंगे, जहां उन्हें तोड़कर नष्ट कर दिया जाएगा। इसका मकसद राजधानी को ‘वाहन जीवन समाप्ति’ नीति (इंड ऑफ व्हीकल लाइफ पॉलिसी) से युक्त पहला भारतीय शहर बनाना है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में 15 साल से ज्यादा पुराने करीब 37 लाख वाहन हैं।

साल के अंत तक नए नियम :
नए नियमों को इस साल के अंत तक अधिसूचित किए जाने की संभावना है। इन्हें राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के 2014 में जारी आदेश को लागू करने के लिए तैयार किया गया है। एनजीटी ने इस आदेश में कहा था कि 15 साल से ज्यादा पुराने वाहनों को दिल्ली की सड़कों पर चलने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए और उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर खड़ा नहीं करना चाहिए। इन नियमों को मार्च में जनता की प्रतिक्रिया और सुझाव लेने के लिए अपलोड किए जाने की संभावना है।

पिछले चार साल से, यातायात पुलिस और परिवहन विभाग ने एनजीटी के आदेश के बावजूद पुराने वाहनों को जब्त करने में लाचारी जताई है। दरअसल अभी इन वाहनों के लिए पार्किंग की कमी है। इन्हें नष्ट करने के लिए कोई उचित तंत्र भी नहीं है।

अपनी तरह की पहली नीति :
दिल्ली परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा, अगर ये मसौदा नियम मंजूर कर लिए जाते हैं, तब वाहनों की जब्ती का काम अगले साल की शुरुआत में आरंभ होगा। आयुक्त (परिवहन) वर्षा जोशी ने कहा, वर्तमान में ऐसा कोई नियम नहीं है, जो पुलिस या सरकार को निर्देशित करे कि जब्त किए गए वाहनों का क्या किया जाए। नए नियम शहर के वाहनों के कबाड़ के व्यापारियों संगठित क्षेत्र के तहत ले आएंगे। यह देश में अपनी तरह की पहली नीति होने जा रही है।

कबाड़ी को मिलेगा लाइसेंस :
‘दिल्ली स्क्रैपिंग ऑफ व्हीकल्स रूल्स, 2018’ के तहत दोपहिया समेत जब्त किए गए सभी वाहन सीधे कबाड़ व्यापारियों के पास भेज दिए जाएंगे। वाहन उन्हीं कबाड़ व्यापारियों के पास भेजे जाएंगे, जिनका नाम सरकार की सूची में दर्ज होगा। कबाड़ व्यापारी उन वाहनों को तोड़ेंगे और मालिकों को कबाड़ की कीमत का भुगतान किया जाएगा। हालांकि कीमत के भुगतान को अभी परिभाषित नहीं किया गया है। नियम को लागू करने का जिम्मा दिल्ली दिल्ली यातायात पुलिस, नगर निगम और परिवहन विभाग का होगा।


मसौदा नियमों के अनुसार, परिवहन विभाग कबाड़ व्यापारियों को लाइसेंस देना शुरू करेगा। लाइसेंस उन्हीं व्यापारियों को दिया जाएगा जिनके पास दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के गैर-रिहायशी इलाके में कम से कम 1000 वर्ग गज का कबाड़खाना होगा। उन्हें दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति द्वारा प्रमाणित भी होना होगा। लाइसेंस के लिए कबाड़ व्यापारियों को 10 लाख रुपये की बैंक गारंटी देनी होगी। कबाड़खाने में सीसीटीवी अनिवार्य रूप से लगाने होंगे। ताकि परिवहन विभाग चौबीसों घंटे उसकी निगरानी कर सके। कबाड़खाने की तीन महीने की रिकार्डिंग भी रखनी होगी।

मालिकों को भी सहूलियत :
इन नियमों के अनुसार, मालिक अपने पुराने वाहन पंजीकृत एक निश्चित राशि के बदले कबाड़ व्यापारियों को दे सकते हैं। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। विशेष आयुक्त (परिवहन) के.के. दाहिया ने कहा, किसी भी सार्वजनिक स्थान पर खड़े किसी रद्दी वाहन को जब्त किया जाएगा और उसके पंजीकृत मालिक को इसकी सूचना दी जाएगी, जिसे 15 दिन के भीतर इसको कबाड़ी के पास ले जाने का वचन देना होगा। मालिक के सामने नहीं आने पर वाहन को कबाड़ व्यापारी के पास भेज दिया जाएगा और उससे मिली राशि सरकारी खाते में चली हो जाएगी। वाहनों को तोड़े जाने से पर्यावरण पर असर न पड़े इसका ध्यान रखा जाएगा।

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