बैंक ऑफ बड़ौदा में नहीं आये हैं नये नोट, बढ़ी हुई है परेशानी बैंक कर्मियों सहित आम जनों के ।

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गौतम सुमन, भागलपुर: स्थानीय सूजागंज बाजार के आनंद चिकित्सालय पथ स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा में नहीं आये हैं नये नोट ।इसका खुलासा करते हुए बैंक प्रबंधक ने बताया कि अन्य बैंकों के खाताधारी भी पुराने बड़े नोट बदलने हेतु बैंक खुलते ही भीड़ लगा देते हैं ।उन्हें समझाने पर उल्टे अपनी जान पर आफत आ जाती है ।सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है ।बढ़ती भीड़ और लोगों की जिद्द के के कारण बैंक कर्मी भोजन -पानी तक नहीं ले पा रहे हैं ।

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यहाँ पर भीड़ इस कदर दिखती है जैसे मेला लगा हुआ है ।अन्य बैंकों के खाताधारियों की बढ़ती भीड़ के कारण यह बैंक अपने खाताधारियों को भी खुश नही कर पा रहा है ।पेट की भूख मिटाने व जरूरत की वस्तुओं की खरीदगी की खातिर आमजन सुबह होते ही बैंको के आगे पंक्तिबद्ध होकर दिन भर कतारबद्ध खड़े हो जाते हैं ।आम जनों की बढ़ती परेशानी व उनके माथे की शिकन के साथ उनकी भूख उन्हें अच्छे दिन आने का एहसास करा रहा है ।बैंक में नये नोट नहीं रहने के कारण इन आमजनों व खाताधारियों को पुराने बड़े नोटों के बदले दस-दस के सिक्के देकर यहाँ खुश किया जा रहा है ।जब कि बाजार में कई दुकानदार बन्धु इन दस के सिक्कों को लेने से साफ इन्कार करते देखे जा रहे हैं ।इनके बैंक प्रबंधक का कहना है कि कई बैंकों में नए नोट भेजे गये हैं पर मेरे बैंक में अब तक नोट नहीं भेजना साफ तौर पर सौतेलापूर्ण रवैया को स्पष्ट करता है ।बावजूद इसके आमजनों के आक्रोश को हम झेलने को विवश हैं ।इस बावत अंग उत्थान आन्दोलन समिति,बिहार-झारखंड के केन्द्रीय अध्यक्ष गौतम सुमन ने प्रधान मंत्री नरेन्दो मोदी द्वारा पुराने बड़े नोटों पर प्रतिबंद लगाने के निर्णय का स्वागत करते हुए इस कदम को साहसिक बताया और कहा कि भले ही स्वीस बैंकों में जमा काला धन वापस फिलहाल न आये पर अपने देश में छुपे काला धन का खुलासा अवश्य होगा ।कोई भी सुकार्य पहले अपने घर से ही शुरू होनी चाहिए ।इस बात को साकार कर रहे हैं पीएम मोदी जी ।उन्होंने कहा कि पहले हर गरीबों के खाते खुलवाये गये और कहा गया कि इन खातों में पीएम की तरफ से पन्द्रह लाख आयेंगे तो क्या हुआ पीएम साहब भले ही इन खातों में पैसे न डालें पर खातेधारियों के हाथों खुद इन खातों में पैसे डलवाने की यह योजना वाकई तारीफे काबिल है ।उन्होंने कहा कि ये तो अच्छे दिन की शुरुआत है जहाँ आमजनों के साथ-साथ बैंककर्मियों की परेशानी बढी है ।उन्होंने इस बढ़ती परेशानियों पर आशंका व्यक्त करते हुए कहा भूख व तड़प से गरीब लाशों की ढेर लग सकती है ।इसके बचाव हेतु भी सरकार को कोई ठोस निर्णय लेने हेतु उन्होंने अनुरोध किया है ।

? लेखक सामाजिक कार्यकर्ता हैं।

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