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योग निद्रा में गए श्रीहरि, अब 8 नवंबर को देवोत्थान एकादशी के बाद शुरू होंगे मांगलिक कार्य

चातुर्मास देवशयनी एकादशी 12 जुलाई से शुरू हो गया है। हिंदू धर्म में मान्‍यता है कि इन 4 महीनों में भगवान विष्‍णु योगनिद्रा में रहते हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि इस समय भगवान क्षीर सागर अनंत शैय्या पर शयन करते हैं। इसलिए इन चार महीनों में शुभ कार्य नहीं होंगे। कार्तिक मास में शुक्‍ल पक्ष की एकादशी पर प्रभु निद्रा से जागते हैं। इस बार देवोत्थान एकादशी 8 नवंबर को है। इसके बाद मांगलिक कार्य शुरू होंगे। चातुर्मास के दौरान 4 माह तक विवाह संस्कार, गृह प्रवेश आदि सभी मंगल कार्य निषेध माने गए हैं।

इस दौरान साधु संत भी भ्रमण नहीं करते हैं। वे एक ही स्थल पर रहकर जप-तप व साधना करेंगे। इन चार माह में साधु-संत बहुत ही नियमों का पालन करते हैं। चातुर्मास में फर्श पर सोना और सूर्योदय से पहले उठना बहुत ही शुभ माना जाता है। आने वाले चार महीने सावन, भादो, आश्विन और कार्तिक में खान-पान और व्रत के नियम और संयम का पालन करना चाहिए। मान्यता है कि सावन में हरी सब्जी़, भादो में दही, आश्विन में दूध और कार्तिक में दाल नहीं खाना चाहिए। हो सके तो दिन में केवल एक बार ही भोजन करना चाहिए।

3 सितंबर से जैन मंदिर में होगा दशलक्षण महापर्व का आयोजन :

इस बार जैन धर्माबलंबियों का दस दिनों तक चलने वाला दशलक्षण महापर्व 3 से 13 सितंबर तक चलेगा। 13 सितंबर को भगवान वासुपूज्य महानिर्वाण महोत्सव होगा। दशलक्षण महापर्व को लेकर अभी से ही श्रद्धालु तैयारी में जुट गए हैं। सद्गुणों से भरे दशलक्षण जिनको अपना कर व्यक्ति मुक्ति पथ का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र के मंत्री सुनील जैन ने बताया कि जैनियों का चातुर्मास 15 जुलाई से 14 नवंबर तक है।

दशलक्षण महापर्व के दस अंग :

जैन समाज में दशलक्षण महापर्व के प्रथम दिन उत्तम क्षमा धर्म, दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म, तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म, चौथे दिन उत्तम सत्य धर्म, पांचवें दिन उत्तम शौच धर्म, छठे दिन उत्तम संयम धर्म, सातवें दिन तप धर्म, आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म, नौवें दिन उत्तम अकिंचन धर्म, दसवें दिन ब्रह्मचर्य धर्म के रुप में मनाया जाएगा।

न्यूज़ डेस्क

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