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मां काली प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद खुल गए पट, माहौल भक्तिमय

जिले के विभिन्न जगहों पर मंगलवार की देर रात मां काली की प्रतिमा वेदी पर स्थापित की गयी। इसके बाद प्रतिमा के पट खोल दिये गये। देर राततक पूजा होती रही।

शहर के बुढ़िया काली मंदिर परबत्ती, बमकाली जोगसर, मशानी काली, ऊर्दू बाजार, मशानी काली बूढ़ानाथ, मशानी काली घंटाघर, कालीबाड़ी, दुर्गाबाड़ी, रिफ्यूजी कॉलोनी, तिलकामांझी, मिरजानहाट, जरलाही, नाथनगर, बरारी आदि जगहों पर मां काली प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद विधि-विधान से पूजा हुई। इस दौरान मंत्रोच्चार व धूप-दीप के सुगंध से माहौल भक्तिमय हो गया।

अंगधात्री शक्तिपीठ के आचार्य पंडित अशोक ठाकुर ने बताया कि मंगलवार को अमावस्या का प्रवेश 10.16 बजे रात में हुआ। मशानी काली, ऊर्दू बाजार में निशारात्रि में मां काली की पूजा तांत्रिक व वैदिक विधि से हुई। उन्होंने बताया कि मां काली के साथ मां लक्ष्मी व मां सरस्वती का आह्वान किया गया। पूजा के साथ 24 घंटे सप्तशती का पाठ शुरू हो गया। हड़बड़िया काली, मंदरोजा में पंडित मनोज कुमार मिश्रा व पांच पंडितों के द्वारा मां काली की पूजा कराई गयी। बम काली मंदिर में वैदिक ढंग से पूजा-अर्चना की गयी। दुर्गाबाड़ी में 10.57 बजे मां की काली प्रतिमा स्थापित हुई। कार्यकारिणी सदस्य निरूपम क्रांतिपाल ने बताया कि इस दौरान मां को खिचड़ी का भोग लगाया गया। परबत्ती काली पूजा समिति द्वारा बुधवार से रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा।

भागलपुर में काली पूजा के अवसर पर कई जगहों पर आकर्षक पंडाल भी बनाये गए हैं। केंद्रीय काली महासमिति के प्रवक्ता गिरीश कुमार भगत ने बताया कि जिले में लगभग 260 प्रतिमाएं स्थापित होती हैं। जिसमें 80 प्रतिमाएं शोभा यात्रा में भाग लेती है।

महानिशिथ काल में होती है मां काली की पूजा
ज्योतिष योग शोध केन्द्र, बिहार के संस्थापक पंडित आरके चौधरी ने बताया कि सनातन धर्म में देवी काली को समर्पित यह पर्व कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। काली की पूजा महानिशिथ काल में करने का विधान है। जो छह नवम्बर की रात्रि में अति शुभ मुहूर्त 11:30 बजे से 12:30 बजे तक है। शास्त्रों में मान्यता के अनुसार इसी दिन माता काली 64 हजार योगिनियों सहित प्रकट हुई थीं।

कई जगहों पर होती है तांत्रिक ढंग से पूजा
कई जगहों पर तांत्रिक व वैदिक रीति-रिवाज से पूजा-अर्चना होती है। हड़बड़िया काली मंदिर के पुजारी पंडित मनोज कुमार मिश्रा ने बताया कि मां काली के गुस्सा को शांत करने के लिए उनके सामने केला व ईख रखा जाता है जिससे मां काली प्रसन्न होती हैं। यहां पांच पंडितों द्वारा स्तुति व हवन कराया जाता है। मशानी काली के पुजारी पंडित अशोक ठाकुर ने बताया कि कालरात्रि के दिन तंत्र की प्रधानता होती है।

शोभायात्रा में मां काली की होगी आरती
मां काली की विसर्जन शोभायात्रा भव्य तरीके से निकाली जायेगी। शोभायात्रा नौ नवंबर की रात में निकलेगी। परबत्ती की प्रतिमा 12 बजे रात तक स्टेशन चौक पहुंच जायेगी। इस दौरान भव्य आरती की जायेगी। 10 नवंबर को मां काली की प्रतिमा का विसर्जन मुसहरी घाट, मायागंज में किया जाएगा। बमकाली पूजा समिति के सचिव अभय घोष सोनू ने बताया कि 10 नवंबर को परबत्ती की बुढ़िया काली व जोगसर की बमकाली का मिलन खलीफाबाग चौक पर होगा।

शोभायात्रा में रथ व नाव से विदा होंगी मां काली
विसर्जन शोभायात्रा के दौरान परबत्ती की प्रतिमा रथ से एवं बूढ़ानाथ मशानी काली की प्रतिमा नाव से विदा होंगी। परबत्ती पूजा समिति के अध्यक्ष कामेश्वर यादव ने बताया कि शोभायात्रा में रथ, घोड़े, के साथ युवक शस्त्र के साथ कलाबाजी दिखाते हुए चलेंगे

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