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मधेपुरा : कभी वर्मी बाबा तो कभी मशरूम बाबा बन किसानों को दे रहे योजनाओं की जानकारी

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मधेपुरा : जिले के विभिन्न प्रखंडों में किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के लिए कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण यानी आत्मा के परियाेजना निदेशक राजन बालन ने नायाब तरीका अपनाया है। वे इसके लिए संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों का सहारा लेने के साथ-साथ अपने रूप में भी परिवर्तन कर लेते हैं। परियोजना निदेशक का यह बदला रूप किसानों को खूब भा रहा है और वे आसानी से सरकार की कृषि संबंधी नीतियों से अवगत हो जाते हैं।

किसानों को करत हैं जागरूक

परियोजना निदेशक कभी वर्मी बाबा तो कभी मशरूम बाबा बनकर किसानों को वर्मी कंपोस्ट का उर्वरक के रूप में उपयोग तथा मशरूम की खेती के बारे में गाना गाकर इसके गुण बताते हैं। किसानों के लिए उन्होंने गेहूं चालीसा, धान चालीसा तथा आलू चालीसा नामक किताब भी लिखा है। इसमें सभी फसलों की खेती समेत उनसे होने वाले फायदे की जानकारी दी गई है।

गेहूं चालीसा का पाठ करते हुए आत्मा के निदेशक कहते हैं- गेहूं है एक ऐसी फसल, करत जो खेती किसान, सुख संपत्ति घर आत है बढ़त मान-सम्मान। खाद्यान्न से परिपूर्ण हो भारत देश महान, राज्य लोक उद्धार हो जन-जन हो कल्याण।

जैविक खाद के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए उन्होंने यह रूप धारण किया है। वर्मी कंपोस्ट के गुणों का जितना भी बखान किया जाए वह कम है। वर्मी कंपोस्ट एक ऐसा भाेग है जिसमें 16 तत्वों का संयोग है। विभाग ने इस पर तकनीकी फिल्म भी बनाई है।

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