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मकर संक्रांति विशेष : 100 सालों से भागलपुर की शान है खुशबूदार कतरनी चूड़ा

भागलपुर : भागलपुर का क्षेत्र कतरनी धान के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है. कतरनी छोटे दाना खुशबूदार धान है, जो बासमती से अलग स्वाद के लिए जाना जाता है. कतरनी 100 वर्ष से पुराना धान है, जो पूर्वी बिहार खासकर भागलपुर-बांका में अधिक उपज होती थी. यह कम उर्वरा वाली मिट्टी में अधिक होता है. दरअसल अधिक उर्वरा वाली मिट्टी में बड़ा पौधा होकर गिर जाता है. यहां पर बाजार व पहचान के अभाव में कतरनी की खेती में लगातार कमी आयी है. इससे क्षेत्र में कतरनी की खूशबू कम हो गयी.

बिहार कृषि विश्वविद्यालय एवं जिला कृषि विभाग के प्रयास से भागलपुरी कतरनी को बढ़ावा देने के लिए जीआई टैग भी मिल चुका है. कतरनी को बढ़ावा देने के लिए नोडल प्रभारी व कर्मचारी की टीम गठित की गयी. कतरनी को बढ़ावा देने के लिए 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से यह बीज आये थे. इसके लिए बांका, भागलपुर व मुंगेर के किसान को कतरनी का बीज भी उपलब्ध कराया गया था.

इतना ही नहीं इस बार 10 किसानों को 10 एकड़ में कतरनी की खेती विशेष निर्देशन में कराया गया था. इससे लगभग 1600 क्विंटल बीज तैयार हुए. 2018 में शुद्ध बीज हरेक इच्छुक किसानों को उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया. जहां पर कतरनी उत्पादन का क्षेत्र चिन्हित किया गया है.

कतरनी उत्पादक क्षेत्र

कतरनी उत्पादन के लिए भागलपुर के जगदीशपुर, सुल्तानगंज, मुंगेर के तारापुर, बांका के रजौन, अमरपुर एवं जमुई के कुछ खास क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है. यहां पर अधिकतर किसान अलग-अलग कारणों से कतरनी की खेती करना छोड़ चुके हैं. जबकि, यहां पर कतरनी की खेती बेहतर हो सकती है. वर्तमान में पूरे जिले में 496 एकड़ में कतरनी की खेती होती है. खासकर जगदीशपुर व सुल्तानगंज क्षेत्रों में प्रति एकड़ 16 क्विंटल के हिसाब से 7936 क्विंटल कतरनी धान का उत्पादन होता है.

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